HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

चाँद की परतें [कविता] - धीरेन्द्र सिंह

Photobucket
चाँद की परतें उकेलता रहा
और उसकी सारी गिरहें खोलकर...

साहित्य शिल्पीरचनाकार परिचय:-
धीरेन्द्र सिंह का जन्म १० जुलाई १९८७ को छतरपुर जिले के चंदला नाम के गाँव में हुआ था|

आपने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा चंदला में ही पूरी की। वर्तमान में आप इंदौर में अभियन्त्रिकी में द्वितीय वर्ष के छात्र हैं|

कविताएँ लिखने का शौक आपको अल्पायु से ही था, किन्तु पन्नो में लिखना कक्षा नवीं से प्रारंभ किया| आप हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में रचनाएं लिखते हैं। आपका 'काफ़िर' तखल्लुस है|

पानी में बहता था,
तो उससे पूंछा भी
ये कैसे चलता है आसमां की सड़कों पर
कभी आधा कभी पूरा
तो कभी गुल हो जाता है

बूंदों के आईने बनाए
और उन एक-एक में चाँद बैठाकर
बहा दी सारी पानी में

अब दस-दस चाँद हैं मेरे पास
अदल-बदल के रोज
अब सारों को चखा करता हूं!!!

एक टिप्पणी भेजें

4 टिप्पणियाँ

  1. एक बेजोड़ रचना | दस दस चाँद वाली बात छू गयी |
    रचना और बढ़ाया होता तो और कुछ सुनते आपसे ...

    बधाई

    अवनीश तिवारी

    जवाब देंहटाएं
  2. ये कैसे चलता है आसमां की सड़कों पर
    कभी आधा कभी पूरा...बेहद उम्दा सोच के लिए धीरेन्द्र जी बधाई!आप सभी को मकरसंक्रान्ति की बधाईयां!

    जवाब देंहटाएं
  3. एक खूबसूरत रचना...बढ़िया लिखे है भाई..बहुत बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं
  4. अच्छी रचना ।बढ़ते रहे।

    जवाब देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...