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लघुता में गुरुता 'सलिल', अलंकार है अल्प. [काव्य का रचना शास्त्र: ६२] - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

Sanjiv Salil

जब कवि लघुता या अल्पता का वर्णन इस तरह करे कि उसमें हीनता के स्थान पर चमत्कार की प्रतीति हो तो वहाँ अल्प अलंकार होता है. इसमें अत्यंत छोटे अधर से भी आधेय का वर्णन किया जाता है.


लघुता में गुरुता 'सलिल', अलंकार है अल्प.
क्षुधा हरती प्रचुरता, तृप्ति दे सके स्वल्प..

उदाहरण:
. अब जीवन कै कपि आस कोई.
कनगुरिया कै मुदरी, कँगना होई.

.राजै बिनु जोर छला छिगुनी के छोर
ता छला मैं मापि लीजे भई छाम कटि बाम की.


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