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बरसात [कविता] - सुमन 'मीत'


Kaifi

घना फैला कोहरा
कज़रारी सी रात
भीगे हुए बादल लेकर
फिर आई है ‘बरसात’

अनछुई सी कली है मह्की
बारिश की बूंद उसपे है चहकी
भंवरा है करता उसपे गुंजन
ये जहाँ जैसे बन गया है मधुवन


रस की फुहार से तृप्त हुआ मन
उमंग से जैसे भर गया हो जीवन
’बरसात’ है ये इस कदर सुहानी
जिंदगी जिससे हो गई है रूमानी!!

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7 टिप्पणियां

  1. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    किसी भी तरह की तकनीकिक जानकारी के लिये अंतरजाल ब्‍लाग के स्‍वामी अंकुर जी,
    हिन्‍दी टेक ब्‍लाग के मालिक नवीन जी और ई गुरू राजीव जी से संपर्क करें ।

    ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत की कक्ष्‍या चल रही है ।

    आप भी सादर आमंत्रित हैं,
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    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
    प्रसार में अपना योगदान दें ।
    यदि आप संस्‍कृत में लिख सकते हैं तो आपको इस ब्‍लाग पर लेखन के लिये आमन्त्रित किया जा रहा है ।

    हमें ईमेल से संपर्क करें pandey.aaanand@gmail.com पर अपना नाम व पूरा परिचय)

    धन्‍यवाद

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  2. सुन्दर प्रस्तुति धन्यवाद्|

    जवाब देंहटाएं
  3. साहित्य शिल्पी का ब्लॉग जगत में हार्दिक स्वागत है !
    मुझे आश्चर्य है कि ब्लॉगजगत से जुड़ने से पहले से मैं साहित्यशिल्पी को पढ़ता आया हूं । मेरे स्वयं के ब्लॉग पर तो आपका लोगो भी लगाया हुआ है ।
    बहुत बहुत शुभकामनाएं !


    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    जवाब देंहटाएं
  4. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

    जवाब देंहटाएं
  5. हार्दिक स्‍वागत है ब्‍लागजगत पर

    जवाब देंहटाएं

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