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साहित्य शिल्पी पर बच्चों का कोना "बाल-शिल्पी" [प्रस्तुति एवं संपादन - डॉ. मोहम्मद अरशद खान] बाल-शिल्पी अंक - 2

प्यारे बच्चों,

आज "बाल-शिल्पी" पर आपके डॉ. मो. अरशद खान अंकल आपके लिये अपनी धरोहर से परिचित कराने के प्रयास में ले कर आये हैं हिन्दी के बडे साहित्यकार "भारतेन्दु हरीश्चंद" का परिचय। इसके साथ ही आपकी खिलखिलाहट को और बढाने के लिये बहुत से चुटकुले भी। तो आनंद उठाईये इस अंक का और अपनी टिप्पणी से हमें बतायें कि यह अंक आपको कैसा लगा।

- साहित्य शिल्पी

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हमारी धरोहर - भारतेंदु हरिश्चंद्र

भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म 9 सितंबर 1850 को बनारस में हुआ। आधुनिक हिंदी साहित्य के र्निमाण में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बच्चों के लिए अलग से तो नहीं लिखा, हां बच्चों को ध्यान में रखकर अवश्य लिखा। उनका ‘सत्य हरिश्चंद्र’ नाटक बच्चों को ध्यान में रखकर ही लिखा गया है। ‘अंधेर नगरी’ उनका अत्यंत प्रसिद्ध प्रहसन है। इसमें उन्होंने अंग्रेजी शासन-व्यवस्था पर व्यंग्य किया है। इसके कुछ गीत बच्चों में बेहद लोकप्रिय रहे हैं। प्रस्तुत है उसी प्रहसन से यह ‘चने का लटका’ नामक गीत-


चना बनावै घासी राम,
जिसकी झोली में दूकान।
चना चुरमुर चुरमुर बोले
बाबू खने को मुंह खोले

चना खावै ताकी मैना,
बोल अच्छा बना चबैना।
चना खाएं गफूरन मुन्ना,
बोले और नहीं कुछ सुन्ना।

चना खाते सब बंगाली,
जिनकी धोती ढीली-ढाली।
चना खाते मियां जुलाहे,
डाढ़ी हिलती गाह-बगाहे।

चना हाकिम सब जो खाते,
सब पर दूना टिकस लगाते।
हंसी बड़ी अनमोल

एक मूर्ख, दूसरे मूर्ख से- नदी का पानी जब खतरे के निशान से ऊपर हो जाए तो क्या करना चाहिए ?
दूसरा मूर्ख- खतरे का निशान और ऊपर कर देना चाहिए।

*****

मोटर मैकेनिक, मोटर मालिक से- सर, क्या एक्साइड की बैटरी लगा दूं ?
मोटर मालिक- एक की नहीं, दोनों साइड की लगा दो वर्ना दोबारा आना पड़ेगा।

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भिखारी ताज होटल में फोन करके- चिकन बिरयानी, मटन कोरमा, मलाई कोफ्ता, शामी कबाब, बटर नान पैक करवाकर फौरन भिजवा दीजिए।
मैनेजर- सर, किसके नाम पर भेजूं ?
भिखारी- अल्लाह के नाम पर

*****

संता- तुम्हें छोटा मेडल किस लिए मिला है ?
बंता- गाने के लिए
संता- और यह बड़ा वाला ?
बंता- गाना बंद करने के लिए।

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संता- तुम्हारी शक्ल देखकर लगता है कि आदमी का पूर्वज बंदर था।
बंता- और तुम्हारी शक्ल देखकर लगता है कि आदमी आज भी बंदर है।

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तो बच्चों अब प्रतीक्षा कीजिये अगले अंक की।

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4 टिप्पणियां

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुतिकरण है। बच्चों को ही नहीं हमारे लिये भी अध्भुत सामग्री है।

    जवाब देंहटाएं
  2. बाल शिल्पी बडा ही अच्छा प्रयास है। मैंने अपने विध्यालय में भी बच्चों को इसके बारे में बताया है।

    जवाब देंहटाएं
  3. चुतकुले अच्छे हैं लेकिन भारतेन्दु की अनमोल कविता है।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया अरशद भई. यह ब्लॉग अभी देखा. काफी कुच्छ है पठनीय. फोल्लो कर रहा हूँ. कभी फुर्सत मिले तो मेरे ब्लोग्स भी देखें- लिंकस हैं-www.rameshtailang.blogspot.com,
    www.nanikichiththian.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं

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