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पैसे की महिमा [लघुकथा] - संजय जनांगल

रामू सोच में पड़ गया कि अब पैसा देखूं या योग्यता ? कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी लड़की का रिश्ता अजय से करूं या विजय से?

मोहन ने कहा “देख यार जमाना बदल गया है। आज सबसे पहले तो लड़के की योग्यता देखनी चाहिए फिर ही कोई फैसला लेना चाहिए। केवल धन दौलत देखकर लड़की की शादी कर देना कोई अक्लमंदी नहीं है।“

“मोहन, अजय है तो बहुत योग्य लड़का। वह मेरी लड़की के बराबर शैक्षिक योग्यता भी रखता है लेकिन वह बहुत गरीब घर से है उसने यहां तक पढ़ाई कैसे की है यह बात पूरे समाज में किसी से छिपी नहीं है और एक तरफ विजय है जो दसवीं फेल है परन्तु उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं है। आखिर कौन बाप अपनी बेटी को सुखी देखना नहीं चाहता?“ रामू ने कहा।

रामू ने समझदारी दिखाते हुए अपनी लड़की का विवाह विजय से कर दिया। लड़की के मना करने के बावजूद उसकी एक नहीं सुनी गई। योग्यता पैसों के आगे बौनी साबित हुई।

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7 टिप्पणियाँ

  1. योग्यता पर पैसा हमेशा भारी पडा है

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  2. जनांगल जी की लघुकथा आज के समय का ही सच दिखाती है यद्यपि कहानी में कोई मोड या नयापन भी होता तो और प्रभावित करती

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  3. सामान्य प्राणी के जीवन मे पेशोपेश का सुन्दर उदाहरण है यह कहानी

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