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मैं भी चंदा बन जाऊँ [बाल-गीत] - डॉ. राजीव श्रीवास्तव

दूर गगन मे चाँद को देखू ,
गोल-गोल सा प्यारा -प्यारा ,
आसमान की खोल के खिड़की
देख रहा कुदरत का नज़ारा ,
मैं भी आसमान मे जा बैठूं ,
बड़े मजे से फिर इतराऊँ ,
एक दिवस के लिए सही,
पर मैं भी चंदा बन जाऊँ !

मुझे भी लोग प्यार से देखे ,
मेरे भी किस्से बतलाएँ ,
बच्चे मामा मामा बोले
मुझको झट से छूना चाहे ,
आँख मिचोली खेलूँ उन संग ,
कभी दिखु कभी छिप जाऊँ ,
एक दिवस के लिए सही,
पर मैं भी चंदा बन जाऊँ !

तारो के संग करूँ दोस्ती ,
उनका लीडर बन जाऊँ ,
उनको अपने पास बुलाऊँ ,
टिम-टिम करना सिखलाऊँ,
बड़े मज़े से रात को निकलूँ ,
दिन मे छिप कर सो जाऊँ ,
एक दिवस के लिए सही,
पर मैं भी चंदा बन जाऊँ !


मैं बादल की करूँ सवारी
बैठ के उन पे इठलाऊं
उड़ती चिड़िया जब कोई देखूं
उसके पँखो को सहलाऊं
हवा को अपने साथ मे लेकर
फिर सैर पे निकल जाऊं
एक दिवस के लिए सही,
पर मैं भी चंदा बन जाऊँ !

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