सजा आरती सात सुहागिन, तेरे दर्शन को आतीं ,
माता तेरी पूजा, अर्चना कर, भक्ति निर्मल पातीं!
दीपक, कुम - कुम अक्षत ले कर, तेरी महिमा गातीं,
माँ दुर्गा तेरे दरसन कर के, वर , सुहाग का पातीं!
वह तेरी महिमा शीश नवां कर गातीं!
हाथ जुडा कर बाल नवातीं, धीरे से हैं गातीं,
"माँ! मेरा बालक भी तेरा" ~~~
ऐसा तुझको हैं समझातीं,
फिर फिर तेरी महिमा गातीं ~~
तेरी रचना, भू -मंडल है!
ऐसे गीत गरबे में गातीं
माता! तुझसे कितनी सौगातें,
भीख मांग ले जातीं!!
माँ! सजा आरती, सात सुहागिन,
तेरे दर्शन को आतीं,
मंदिर जा कर शीश नवाकर,
ये तेरी महिमा गातीं!

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