HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

जो मर गये या मार दिये गये [कविता] - अनिल कांत

जो मर गये या मार दिये गये
वे तराजू के पलड़ों की तरह हैं
जिन्हें तौला जाता रहा है
बारी-बारी
कम और ज्यादा की तरह ।

फर्क सिर्फ इतना है कि
कुछ भुला दिये गये थे मरने से पहले
और कुछ भुला दिये जायेंगे मरने के बाद
हमेशा के लिये ।

रहेगी तो बस गिनती
उन सभी जमा सरकारी कागजों में
जो धूल चाटते हैं
बंद किसी कोने में ।

बावजूद इसके
भूख और नंगेपन के साथ
फिर से जमा हो जायेंगे
हाथ में बन्दूक लिए
मर गये या मार दिये गये
श्रेणी के लिए
अनगिनत उम्मीदवार

तुम बस खुश रहना
क्योंकि
फिलहाल तुम उनमें से कोई नहीं

टिप्पणी पोस्ट करें

4 टिप्पणियां

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...