HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

जिंदगी एक रिश्ता, एक फासला [कविता] - देवी नागरानी

कागज़ के कोरे पन्ने
जिँदगी तो नहीं
न ही काले रँग की पुतन
का नाम है जिँदगी.

"जिँदगी है एक रिशता"
एक लहर का दूजे से
धूप का छाँव से
दुख का सुख से
रात का दिन से
अँधेरे का रौशनी से.

"जिँदगी है एक फासला"
वो तो सूरज की
पहली किरण से शुरू होकर
उसी किरण के अस्त होने
तक का फासला है
जीवन की हद से,
मौत की सरहद तक का फ़ासला.

ज़िंदगी सुबह की पहली किरण है
मौत साँझ की आखिरी किरण है

यही जिँदगी है
यही उसकी हद है, और सरहद भी
यही जिंदगी है
एक रिशता भी, एक फासला भी.

टिप्पणी पोस्ट करें

5 टिप्पणियां

  1. जिंदगी एक रिश्ता, एक सरहद, एक फासला ! वाह! ज़िन्दगी की पूरी पहचान है यह रचना। इस खेल की पारी हमारे हाथ में है, इसे जैसे चाहें खेलें । बधाई देवी जी ।
    सप्रेम,
    शशि पाधा

    जवाब देंहटाएं
  2. यही जिँदगी है
    यही उसकी हद है, और सरहद भी
    यही जिंदगी है
    एक रिशता भी, एक फासला भी

    जीवन के रहस्यों की परतें खोलती है नागरानी जी की कविता।

    जवाब देंहटाएं
  3. देवी जी अच्छी कविता है | बधाई |
    सुधा ओम ढींगरा

    जवाब देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...