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मिमियाती ज़िन्दगी, दहाडते परिवेश [ग़ज़ल संग्रह से रचनायें -5] - लाला जगदलपुरी

[मिमियाती ज़िन्दगी दहाडते परिवेश संग्रह से आज प्रस्तुत है लाला जगदलपुरी की तीन ग़ज़लें - संपादक, साहित्य शिल्पी]

त्रासदी के गुरगो संभलो तुम

सांसों की गलियो, संभलो तुम,
आशा की कलियो, संभलो तुम!

बगिया में नीरस फूल तथा
कैक्टस हैं अलियो, संभलो तुम!

उन्हें रिझाया कोलाहल नें,
स्नेह की अंजलियो, संभलो तुम!

बुझा न दे तुम्हें कहीं आँसू
रोशनी के टुकडो, संभलो तुम!

सहानुभूतियों को पहिचानो
त्रासदी के गुरगो, संभलो तुम!

-----

कर दिया है तिमिर नें दुर्बल बहुत

अल्प-जीवी पुष्प इतना कर गया,
सूर्य को शबनम पिला कर झर गया।

साथ मेरे सिर्फ सन्नाटा रहा,
चांद सिरहाने किरन जब धर गया।

कर दिया है तिमिर नें दुर्बल बहुत,
मन अभागा रौशनी से डर गया।

लहलहाई ज़िन्दगी की क्यारियां,
किंतु सोने का हिरण सब चर गया।

हृदय तडपा तो छलक आये नयन,
स्नेह सारा हृदय हेतु निथर गया।

क्या करे कोई सुराही क्या करे,
यदि किसी के कण्ठ में विष सर गया।

-----

नयी सुबह की सुधि में

नींद के गाँव एक सपन जागा,
प्रतिध्वनित सूनापन जागा।

गंध पी पी रजनीगंधा की,
मदिर-मदिर मधुर पवन जागा।

कुटीर सोया खुर्राटों में,
परंतु निर्दयी भवन जागा।

स्वयं परिचित नहीं स्वयं से ही,
अविस्मरणीय विस्मरण जागा।

रात भर नयी सुबह की सुधि में,
दीपक बार कर गगन जागा।

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6 टिप्पणियां

  1. बुझा न दे तुम्हें कहीं आँसू
    रोशनी के टुकडो, संभलो तुम!

    सहानुभूतियों को पहिचानो
    त्रासदी के गुरगो, संभलो तुम!

    बहुत ही प्रभावी कवितायें हैं।
    ---
    साहित्य शिल्पी में कुछ तकनीकी दिक्कते हैं कि पेज खोलने में तथा टिप्पणी करने में असुविधा हो रही है।

    जवाब देंहटाएं
  2. लहलहाई ज़िन्दगी की क्यारियां,
    किंतु सोने का हिरण सब चर गया।

    बेमिसाल

    जवाब देंहटाएं
  3. सभी शेर बेहतरीन हैं। लाला जी को पढवाने के लिये धन्यवाद

    अल्प-जीवी पुष्प इतना कर गया,
    सूर्य को शबनम पिला कर झर गया।

    साथ मेरे सिर्फ सन्नाटा रहा,
    चांद सिरहाने किरन जब धर गया।

    जवाब देंहटाएं
  4. हृदय तडपा तो छलक आये नयन,
    स्नेह सारा हृदय हेतु निथर गया।

    क्या करे कोई सुराही क्या करे,
    यदि किसी के कण्ठ में विष सर गया।
    ....

    आहा....


    रात भर नयी सुबह की सुधि में,
    दीपक बार कर गगन जागा।


    संवेदनशील मन की दहकती ज्वाला में लेखनी जो भी लिखती है...दूर तक पंहुचता है....नमन....

    जवाब देंहटाएं

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