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आये बिना बहार की, रवानी चली गयी [गीतिका] - अजय यादव

आये बिना बहार की, रवानी चली गयी
देखा जो आइना लगा, जवानी चली गयी

खेलने की उम्र में, खिलौने न पा सके
हकीकतों के बोझ में, कहानी चली गयी

पूजा था जिसे रात-दिन, कान्हा नहीं मिला
राणा के साथ मीरा, दीवानी चली गयी

बाकी रहा न कुछ भी, सिर्फ याद रह गयी
पाई थी जो यार से, निशानी चली गयी

बच्चे नये दौर के, सब जानते हैं अब
मासूमियत, वो आँख की हैरानी चली गयी

गमे-ज़ीस्त के सिवा, कुछ बचा नहीं ’अजय’
सारे ज़हन में फैलती, वीरानी चली गयी

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5 टिप्पणियां

  1. खेलने की उम्र में, खिलौने न पा सके
    हकीकतों के बोझ में, कहानी चली गयी

    पूजा था जिसे रात-दिन, कान्हा नहीं मिला
    राणा के साथ मीरा, दीवानी चली गयी

    बहुत खूब अजय जी

    जवाब देंहटाएं
  2. गमे-ज़ीस्त के सिवा, कुछ बचा नहीं ’अजय’
    सारे ज़हन में फैलती, वीरानी चली गयी

    बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  3. rchna ka sundr ridm hai prishm kiya hai
    bdhai
    pr mira rna ke sath nhi gai us ne vish pan kr liya nag ko dharn kr liya kya 2 nhi sha tbhi vh mira bni jo nhi sah ski vh mira nhi bn ski vh rana ke sath beshk chli gai
    is liye dost mira mira hai poojniy hai ise poojniy hi rhne do maa maa hi rhti hai use koi beta glti krne pr bhi gali nhi deta
    smmaniy prtikon ka is trh pryog nhi hona chahiye kevl hindu hee aisa krte hain jb ki any doosre mt ka koi bhi aisi himmt ni kr skta hai
    is liye mitr aap se nivedn hai aap ise bhi dhyan me rkhen

    जवाब देंहटाएं

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