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डूब गया मैँ यार [ग़ज़ल] - सिराज फ़ैसल ख़ान


डूब गया मैँ यार किनारे पर वादोँ की कश्ती मेँ
और ज़माना कहता है कि डूबा हूँ मैँ मस्ती मेँ

ठीक से पढ़ भी नही सका और भीग गयीँ आँखेँ मेरी
मीर को रखकर भेज दिया है ग़ालिब ने एक चिठ्ठी मेँ

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस मेँ सब भाई हैँ
सरकारी ऐलान हुआ है आज हमारी बस्ती मेँ

रोज़ कमीशन लग के वेतन बढ़ जाता है अफसर का
और ग़रीबी पिसती जाती मँहगाई की चक्की मेँ

लातेँ घूसे चप्पल जूते राजनीति मेँ चलते थे
संसद भी चलती है भइया अब तो धक्का-मुक्की मेँ
रचनाकार परिचय:-
नाम: सिराज फ़ैसल ख़ान
पिता का नाम: श्री मुमताज़ हसन ख़ान
माता का नाम: श्रीमती शमसुन्निशा बेगम
ग्राम- महानंदपुर तहसील- पुवायाँ ज़िला- शाहजहाँपुर(उप्र)

ग़ज़लोँ और कविताओँ मेँ बचपन से रुचि है। वर्तमान मेँ गाँधी फ़ैज़ ए आम कॉलेज शाहजहाँपुर से बी एस सी कर रहे हैँ।कई ग़ज़लेँ और कविताएँ अब तक लिख चुके हैँ।कविताकोश मेँ भी आपकी रचनाएँ सम्मिलित की गयी हैँ।

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8 टिप्पणियाँ

  1. सिराज फ़ैसल ख़ान साहेब की गज़ल कमाल की है, बधाई.




    हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस मेँ सब भाई हैँ
    सरकारी ऐलान हुआ है आज हमारी बस्ती मेँ

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत कमाल की गजल है। आभार।

    जवाब देंहटाएं
  3. ठीक से पढ़ भी नही सका और भीग गयीँ आँखेँ मेरी
    मीर को रखकर भेज दिया है ग़ालिब ने एक चिठ्ठी मेँ...

    सिराज फ़ैसल ख़ान जी,
    बेहद शानदार अशआर.....
    बहुत खूब कहा है आपने ...।

    जवाब देंहटाएं
  4. भावपूर्ण ग़ज़ल के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं

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