HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

अपनी औकात [कविता] - डॉ. वेद व्यथित

नही जरूरत रिश्वत है खोरी की जाँच करने की
वो तो बात पुरानी है सत्ता उस से कब्जाने की
नया घोटाले ही क्या कम हैं इन पर हल्ला कम है क्या
तुम को छूट मिली है कितनी इन पर शोर मचाने की ||

चोरों को संरक्षण दे कर भी सत वादी बने हुए
सौ २ चूहे खा कर के भी हज जाने पर अड़े हुए
घोटाले और गडबड का अपना इतिहास पुराना है
फिर भी हम सौगंध उठाने की जिद पर है अड़े हुए ||

हम तो कठपुतली हैं भइया खूब नचाये नाचेंगे
है नकेल जिस के हाथों में चरण उसी के चापेंगे
पद की शोभा ही क्या कम है जिस पर शोभित हैं भइया
हम तो मैया के कूकर हैं पूंछ हिला कर नाचेंगे ||

टिप्पणी पोस्ट करें

1 टिप्पणियां

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...