HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

प्रेमगीत [कविता] - भावना शर्मा

रात अचानक
कोई तीखी सी
आवाज़
कानों को
बेध गयी ..

आँखे खुली
कानों से
सुनने का प्रयास

वही सूर,
आवाज़;
झिगुर है ..
जो अक्सर
रातों में
जागा करता है
इंसानों के
सो जाने के बाद
वो, प्रेमगीत गता है ..

यहाँ तोह मनष्य
प्रेम क भाषा ही
भूल गया है

तभी तो
चुभता है
उसका गाया हुआ
रात अचानक
कोई तीखी सी
आवाज़
कानों को
बेध गयी ..

आँखे खुली
कानों से
सुनने का प्रयास

वही सूर,
आवाज़;
झिगुर है ..
जो अक्सर
रातों में
जागा करता है
इंसानों के
सो जाने के बाद
वो, प्रेमगीत गता है ..

यहाँ तोह मनष्य
प्रेम क भाषा ही
भूल गया है

तभी तो
चुभता है
उसका गाया हुआ
प्रेमगीत भी ..

-----
कवियित्री भावना शर्मा नालंदा अकादमी, कोटा में कार्यरत हैं।
आप निरंतर अनेकों पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं।

टिप्पणी पोस्ट करें

2 टिप्पणियां

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...