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अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’[धरोहर] {बाल शिल्पी अंक 12} - डॉ. मो. अरशद खान


प्यारे बच्चों,

"बाल-शिल्पी" पर आज आपके डॉ. मो. अरशद खान अंकल आपको "अपनी धरोहर" के अंतर्गत हिंदी के पहले कवि माने जाने वाले अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' से परिचित करायेंगे। यह अंक कुछ विलम्ब से प्रस्तुत हुआ क्योंकि आपकी ई-पत्रिका में कुछ तकनीकी परिवर्तन किये जा रहे थे, अत: क्षमा। तो आनंद उठाईये इस अंक का और अपनी टिप्पणी से हमें बतायें कि यह अंक आपको कैसा लगा।

- साहित्य शिल्पी

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हरिऔध का जन्म 15 अप्रैल सन् 1865 में आजमगढ़ के निजामाबाद में हुआ था। खड़ी बोली कविता को स्थापित करने वालों में आपका नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। ‘प्रियप्रवास’ खड़ी बोली हिंदी का पहला महाकाव्य कहा जाता है।

आपने बच्चों के लिए कई सुंदर और महत्वपूर्ण काव्य-संग्रह बाल साहित्य जगत को दिए हैं। ‘बाल-विभव’, ‘बाल-विलास’, ‘फूल-पत्ते’, ‘पद्य-प्रसून’, ‘चंद्र-खिलौना’, ‘खेल-तमाशा’ आदि संग्रहों में बालोपयोगी विषयों पर सुंदर कविताएं हैं।

प्रस्तुत हैं उनकी कुछ कविताएं--

उठो लाल, अब आंखें खोलो,
पानी लाई हूं मुंह धो लो।
बीती रात, कमल दल फूले,
उनके ऊपर भौंरे झूले।
चिड़ियां चहक उठीं पेड़ों पर।
बहने लगी हवा अति सुंदर।
नभ में न्यारी लाली छाई,
धरती ने प्यारी छवि पाई।
भोर हुई, सूरज उग आया।
जल में पड़ी सुनहरी छाया।
ऐसा सुंदर समय न खोओ,
मेरे प्यारे, अब मत सोओ !

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चंदा मामा, दौड़े आओ,
दूध कटोरा भरकर लाओ।
उसे प्यार से मुझे पिलाओ,
मुझ पर छिड़क चांदनी जाओ।
मैं तेरा मृगछौना लूंगा,
उसके साथ हंसू-खेलूंगा।
उसकी उछल-कूद देखूंगा,
उसको चाटूंगा-चूमूंगा।

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ज्यों निकलकर बादलों की गोद से
थी अभी एक बूंद कुछ आगे बढ़ी,
सोचने फिर-फिर यही जी में लगी-
हाय, क्यों घर छोड़कर मैं यों कढ़ी!
दैव मेरे भाग्य में है क्या बदा
मैं बचूंगी या मिलूंगी धूल में,
या जलूंगी गिर अंगारे पर किसी
चू पड़ूंगी या कमल के फूल में।
बह गई उस काल इक ऐसी हवा,
वो समंदर ओर आई अनमनी।
एक सुंदर सीप का मुंह था खुला,
वो उसी में जा गिरी मोती बनी।
लोग यों ही हैं झिझकते-सोचते,
जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर।
किंतु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें
बूंद लौं कुछ और ही देता है कर।

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4 टिप्पणियाँ

  1. बहुत चुन चुन कर रचनायें डॉ. अरशद नें प्रस्तुत की हैं। सचमुच यह धरोहर है हमारी।

    जवाब देंहटाएं
  2. Thanks Dr. Sahib. Very intresting and important article.

    जवाब देंहटाएं

  3. Admin, if not okay please remove!

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    जवाब देंहटाएं

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