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माना , चलने के हैं उसमें हौसले ही हौसले [ग़ज़ल] - प्राण शर्मा





माना, चलने के हैं उसमें हौसले ही हौसले
टेढ़े - मेढ़े रास्तों पर और वो कितना  चले

उसके जैसा यूँ तो चढ़ना जानता है हर कोई
कोई है ऐसा कि जो महताब के जैसा  ढले

दुख से घबरा कर बिलखना कर दिया तुमने शुरू
क्या तुम्हारे सो गये हैं इतने में ही  वलवले

इतनी  हिम्मत है कहाँ जो रोक पायें हम उन्हें
मौत जैसा बनके अक़सर  आते हैं  कुछ  ज़लज़ले

मान   लेते   हैं   सभीके   मशवरे    हम    दोस्तो
अपने   तो   सब   फैसले   होते   हैं   ऐसे   फैसले

मेरे  साथी , मुझको डर है कुछ कभी ऐसा न हो
तेरी हर जिद तेरी नज़रों को ही कचरे सी खले

पाओगे   हर एक  पल  मुझको ही अपने  आसपास
देख लेना  " प्राण " तुम लग कर कभी मेरे गले

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9 टिप्पणियाँ

  1. वाह!! क्या बात है, आनन्द आ गया.

    प्राण जी को बधाई...


    मेरे साथी , मुझको डर है कुछ कभी ऐसा न हो
    तेरी हर जिद तेरी नज़रों को ही कचरे सी खले

    जवाब देंहटाएं
  2. हमेशा की तरह दिल को छू जाने वाली गज़ल्……………बेहद शानदार्…………आभार्।

    जवाब देंहटाएं
  3. मेरे साथी , मुझको डर है कुछ कभी ऐसा न हो
    तेरी हर जिद तेरी नज़रों को ही कचरे सी खले.
    क्या बात है .बेहद उम्दा .

    जवाब देंहटाएं
  4. प्राण शर्मा जी बहुत ही सुंदर ग़ज़ल, खास कर ये मिसरा कुछ ज़्यादा ही अपील कर रहा है:-

    मान लेते हैं सभी के मशवरे हम दोस्तो

    जवाब देंहटाएं
  5. आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो, आपकी लेखन विधा प्रशंसनीय है. आप हमारे ब्लॉग पर भी अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "अनुसरण कर्ता" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
    डंके की चोट पर

    जवाब देंहटाएं
  6. Pranji ki Ghazal ahmesha siksha pradaan karti hui aage badhti hai. bahut hi sunder kafion ka istemaal bakhoobi kiya hai
    इतनी हिम्मत है कहाँ जो रोक पायें हम उन्हें
    मौत जैसा बनके अक़सर आते हैं कुछ ज़लज़ले
    anand aa gaya padhte hue..waah

    जवाब देंहटाएं
  7. पाओगे हर एक पल मुझको ही अपने आसपास
    देख लेना " प्राण " तुम लग कर कभी मेरे गले

    waah pran saheb , waah !!!

    is ek sher se aapne apni insaniyat ka parichay de diya .. waah waah , mera salam kabul kare sir .. poori gazal hi bahut sundar hai ...
    aabhaar !!

    जवाब देंहटाएं

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