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नया सुधार [कविता] - अवनीश तिवारी

अब नया सुधार चाहिए
जीवन के हर पल मे,
समस्याओं के हल मे,
प्रगती मे, प्रयास मे ,
उन्नती और उल्लास मे ,
सच्चाई का आधार चाहिए
अब नया सुधार चाहिए

मन की संबलता के लिए.
निर्णयों की प्रबलता के लिए.
बुराई के निकास के लिए.
व्यक्तित्व के विकास के लिए,
ज्ञान कुछ उधार चाहिए ,
अब नया सुधार चाहिए

लाये नए युग को जो,
बदले नए युग मे जो,
नूतन विचार ले आए जो,
नव लहू संचार कराये जो,
जन ऐसे चार चाहिए,
अब नया सुधार चाहिए

तोड़ विषमता, नव रीत लाने,
हटा द्वेष , नित प्रीत लाने,
भूला दुख , सुख - गीत लाने,
जीवन - महाभारत में जीत लाने,
कृष्ण , गीता - सार चाहिए,
अब नया सुधार चाहिए |

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6 टिप्पणियां

  1. परिवर्तन की आँधी हर ओर चल रही है अवनीश जी।

    जवाब देंहटाएं
  2. तोड़ विषमता, नव रीत लाने,
    हटा द्वेष , नित प्रीत लाने,
    भूला दुख , सुख - गीत लाने,
    जीवन - महाभारत में जीत लाने,
    कृष्ण , गीता - सार चाहिए,
    अब नया सुधार चाहिए |

    सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  3. लाये नए युग को जो,
    बदले नए युग मे जो,
    नूतन विचार ले आए जो,
    नव लहू संचार कराये जो,
    जन ऐसे चार चाहिए,
    अब नया सुधार चाहिए
    sahi likha hai aapne
    sunder kavita
    badhai
    rachana

    जवाब देंहटाएं
  4. नया सुधार चाहिए....


    सही और सुंदर.....
    बधाई आपको अवनीश जी...

    जवाब देंहटाएं

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