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मिलकर ख़त्म नहीं कर सकते देश से भ्रष्टाचार [ग़ज़ल] - सिराज फ़ैसल ख़ान



हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई चारों हैं बेकार
मिलकर ख़त्म नहीं कर सकते देश से भ्रष्टाचार

जिस दिन हम सब एक हो गए यकीं करो मेरा
क़दमों में झुक जाएगा हम सब के ये संसार

आतंकी ए. सी. जेलों में मौज मनाते हैं
सरहद पर मरने वालों का ख़ून गया बेकार

सड़कों पर अब आ जाओ गर देश बचाना है
शहीद-ए-आज़म करो धमाका बहरी है सरकार

अब बारी है नये ख़ून की, हटें सभी बीमार
बहुत लग गया दिल्ली में इन कौओं का दरबार

मुझे जगाना है हर सोये हिन्दुस्तानी को
बिस्लिम मेरे दिल मेँ हैँ और कलम मेरा हथियार।

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4 टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुन्दर .... !

    वर्षों से सोये राष्ट्र ने आज करवट बदली है
    वास्तविक जागरण और हुंकार अभी भरनी है

    इस महानायक का तप हो न जाय बेकार ...
    भ्रष्टाचारी के विरुद्ध हर घर से मुहिम करनी है

    आइये इस कारवां को अभिनव आंदोलन में बदल दें ....

    जवाब देंहटाएं
  2. anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna anna ....hum tumhare saath h..

    जवाब देंहटाएं

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