HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

अभिलाषा [कविता]- दीप्ति सिन्हा


एक थी चिड़ियाँ भोली भाली
घूम रही थी डाली डाली
इतने मे आया एक कबूतर
मायूस सा बेजान सा
चिड़ियाँ उससे लगी भली
लेचाला वोह अपनी गली
कबूतर को वोह आई न रास
रहने लगा वोह उससे बेजार
कभी आता कभी न आता
दाना खाना डालके जाता
चिड़ियाँ रहने लगी उदास
कौन बजाये उसकी प्यास
हरदम वोह अनसु से रोती
अपना दुःख वोह चुजू से खेती 
फिर भी उसको यह हँ आशा
पूरी होगी उसकी अभिलाषा
एक दिन कबूतर आयेगा
प्यार से गले लगाएगा

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...