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आँख का पानी [गीतिका] - डॉ अ कीर्तिवर्धन

होने लगा है कम अब आँख का पानी,
छलकता नहीं है अब आँख का पानी|

कम हो गया लिहाज,बुजुर्गों का जब से,
मरने लगा है अब आँख का पानी|

सिमटने लगे हैं जब से नदी,ताल,सरोवर
सूख गया है तब से आँख का पानी|

पर पीड़ा मे बहता था दरिया तूफानी
आता नहीं नजर कतरा ,आँख का पानी|

स्वार्थों कि चर्बी जब आँखों पर छाई
भूल गया बहना,आँख का पानी|

उड़ गई नींद माँ-बाप कि आजकल
उतरा है जब से बच्चों कि आँख का पानी|

फैशन के दौर कि सबसे बुरी खबर
मर गया है औरत कि आँख का पानी|

देख कर नंगे जिस्म और लरजते होंठ
पलकों मे सिमट गया आँख का पानी|

लूटा है जिन्होंने मुल्क का अमन ओ चैन
उतरा हुआ है जिस्म से आँख का पानी|

नेता जो बनते आजकल,भ्रष्ट,बे ईमान हैं
बनने से पहले उतारते आँख का पानी|

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