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पुस्तकालय [लघुकथा] - शोभा रस्तोगी शोभा



वह मीडिया से थी | चेनल पर मसालेदार खबर परोसने के लिए उसे शहर यकायक उसकी नज़र एक पुस्तकालय पर पड़ी | ज्ञात हुआ कि किसी पुस्तक-प्रेमी ने अपनी इमारत के बेसमेंट में पुस्तकालय कि स्थापना की है | 

प्रश्न था कि उन्होंने पुस्तकालय ही क्यों बनवाया ,कोई मॉल क्यों नहीं जिससे उन्हें आमदनी भी होती? 

उत्तर था- उनके पुस्तक-प्रेम ने ऐसा करवा दिया | 

उसने यह खबर, साक्षात्कार चेनल को दिया ताकि अच्छे कार्य के प्रति भावना का विकास हो सके |

चेनल पर वह न्यूज नहीं आई | विपरीत इसके उसे चटपटी खबर न देने के एवज में मेमो पकड़ा दिया गया |

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