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मैना की शादी [फुलवारी] - शंभूलाल शर्मा 'बसंत' {बाल शिल्पी अंक 18} प्रस्तुति - डॉ. मो. अरशद खान


प्यारे बच्चों,
"बाल-शिल्पी" पर आज आपके डॉ. मो. अरशद खान अंकल आपको "फुलवारी" के अंतर्गत शंभूलाल शर्मा 'बसंत' अंकल की कविता "मैना की शादी" पढवा रहे हैं। तो आनंद उठाईये इस अंक का और अपनी टिप्पणी से हमें बतायें कि यह अंक आपको कैसा लगा।

- साहित्य शिल्पी
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अमरार्इ तो खूब सजी है
मैना की है शादी,
इसीलिए तो बगिया-बगिया
कोयल करे मुनादी।

पड़की, सुग्गा, श्यामा, बुलबुल
इक से एक चिरैया,
हंस-हंस मैना से बतियाएं
संग में है गौरैया।

चूं-चूं, चीं-चीं, कूं-कूं कितने
स्वर में गाएं बढि़या,
ताक-धिनाधिन, फुदक-फुदककर
नाच रही हैं चिडि़यां।

डाल-डाल हर पात सजा है
मौसम है सुखदार्इ,
शादी के दिन मैना रानी
मन ही मन सकुचार्इ।

सोच रही है मैना क्या-क्या
हुर्इ शर्म से लाल,
मुझे बता दे, कोर्इ-
कैसी होती है ससुराल।

शंभूलाल शर्मा 'बसंत, रायगढ़, (छत्तीसगढ़)

टिप्पणी पोस्ट करें

8 टिप्पणियां

  1. शंभूलाल जी बधाई।

    सोच रही है मैना क्या-क्या
    हुर्इ शर्म से लाल,
    मुझे बता दे, कोर्इ-
    कैसी होती है ससुराल।

    अच्छी रचना है।

    जवाब देंहटाएं
  2. बाल साइत्य के क्षेत्र में अरशद जी का काम महत्व का है। चुटीली कविता का आभार।

    जवाब देंहटाएं
  3. कविता में शरारत की सोंधी सोंधी सी महक है

    जवाब देंहटाएं
  4. बाल शिल्पी की सभे प्रस्तुतियाँ अच्छीलगती हैं।

    जवाब देंहटाएं
  5. सुंदर और मनभावन बाल कविता के लिये शंभूलाल शर्मा जी को बधाई...

    जवाब देंहटाएं
  6. आप सभी को आभार
    शंभूलाल शर्मा "वसंत"
    फोन न.9300969616

    जवाब देंहटाएं

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