प्यारे बच्चों,
"बाल-शिल्पी" पर आज आपके डॉ. मो. अरशद खान अंकल आपको "फुलवारी" के अंतर्गत अखिलेश श्रीवास्तव 'चमन’ अंकल की कविता "सूरज-सा चमकें" पढवा रहे हैं। तो आनंद उठाईये इस अंक का और अपनी टिप्पणी से हमें बतायें कि यह अंक आपको कैसा लगा।
- साहित्य शिल्पी
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सुमन बनें हम हर क्यारी के बन उपवन महकें,
चलो दोस्त हम सूरज बनकर धरती पर चमकें।
फिर क्यों बंटा-बंटा-सा मन है ?
आओ स्नेह कलश बनकर हम हर उर में छलकें
चलो दोस्त हम सूरज बनकर धरती पर चमकें।
चुप्पी साधे हर घर आंगन।
बुलबुल, कोयल, मैना बनकर डाल-डाल चहकें
चलो दोस्त हम सूरज बनकर धरती पर चमकें।
अमृत-विष मिलजुलकर पी लें।
हर मुशिकल से तपकर निकलें कुंदन बन दमकें।
चलो दोस्त हम सूरज बनकर धरती पर चमकें।
"बाल-शिल्पी" पर आज आपके डॉ. मो. अरशद खान अंकल आपको "फुलवारी" के अंतर्गत अखिलेश श्रीवास्तव 'चमन’ अंकल की कविता "सूरज-सा चमकें" पढवा रहे हैं। तो आनंद उठाईये इस अंक का और अपनी टिप्पणी से हमें बतायें कि यह अंक आपको कैसा लगा।
- साहित्य शिल्पी
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सुमन बनें हम हर क्यारी के बन उपवन महकें,
चलो दोस्त हम सूरज बनकर धरती पर चमकें।
एक धरा है, एक गगन है,
सबकी खातिर एक पवन है,फिर क्यों बंटा-बंटा-सा मन है ?
आओ स्नेह कलश बनकर हम हर उर में छलकें
चलो दोस्त हम सूरज बनकर धरती पर चमकें।
कहीं खो गया है अपनापन,
सबके होठों पर सूनापन,चुप्पी साधे हर घर आंगन।
बुलबुल, कोयल, मैना बनकर डाल-डाल चहकें
चलो दोस्त हम सूरज बनकर धरती पर चमकें।
नयन किसी के रहें न गीले,
हंसते-हंसते जीवन जी लें,अमृत-विष मिलजुलकर पी लें।
हर मुशिकल से तपकर निकलें कुंदन बन दमकें।
चलो दोस्त हम सूरज बनकर धरती पर चमकें।
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अखिलेश श्रीवास्तव 'चमन’, लखनऊ,(उ0प्र0)
5 टिप्पणियाँ
कितना सुन्दर गीत
जवाब देंहटाएंनयन किसी के रहें न गीले,
हंसते-हंसते जीवन जी लें,
अमृत-विष मिलजुलकर पी लें।
हर मुशिकल से तपकर निकलें कुंदन बन दमकें।
चलो दोस्त हम सूरज बनकर धरती पर चमकें।
बहुत खूब बहुत खूब
जवाब देंहटाएंयदि बाल गीतों कोस्वर के साथ भी प्रस्तुत किया जाये तो आनंद दुगुना हो जायेगा।
जवाब देंहटाएंइसमें भोत कुछ पढ़ने के लिए हैं।
जवाब देंहटाएंइसमें बहुत कुछ बच्चों के पढ़ने को है।
जवाब देंहटाएंआपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.