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चतुराई [लघुकथा] - संजय जनांगल


काफी लम्बे अर्से बाद अपने मित्र शर्माजी से मिलने आये किशन ने पूछा, "दरवाजे पर ये क्या लिखवा रखा है - कुत्ते से सावधान?"

"वो यार सेल्समैनों से परेशान होकर लिखवाया है।"

"लेकिन तुझे तो कुत्तों से एलर्जी है?"

"केवल प्लेट ही लगी हुई है। कुत्ता-वुत्ता कुछ नहीं है।"

यार की ऐसी चतुराई देखकर किशन हक्का-बक्का रह गया।

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1 टिप्पणियां

  1. ना हे नवीनता है और ना तीक्ष्णता | मजा नही आया :(

    अवनीश तिवारी
    मुम्बई

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