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एक जुनून इस ‘‘सायकिल टीचर’’ आदित्य का ! [व्यक्ति परिचय] - सुनील अमर


कहावत है कि वह जुनून क्या जो सिर चढ़कर न बोले! ऐसा ही एक जूनून सिर पर सवार है लखनऊ के आदित्य कुमार पर। आदित्य लोगों को अंग्रेजी में निपुण करना चाहते हैं वह भी मुफ्त में। वे चाहते हैं कि आज के छात्रों व युवाओं को कम से कम इतनी अंग्रेजी जरुर आये कि वे अपनी रोजमर्रा की आवश्यकताओं को बेहिचक पूरी कर सकें। आदित्य साधनहीन हैं लेकिन यह साधनहीनता उनके उत्साह को कम नहीं कर सकी है। अपनी आजीविका के लिए वे ट्यूशन पढ़ाते हैं लेकिन उनमें समाज निर्माण का जज़्बा ऐसा है। एक पुरानी सी बाइसिकिल पर अपना साजो-सामान बॉंधकर आदित्य सड़क-सड़क, गली-गली और झुग्गी-झोपड़ियों में घूम-टहल कर जरुरतमंदों को अंग्रेजी भाषा का निःशुल्क प्रशिक्षण देते हैं। ऐसा वे पिछले पॉच वर्षों से नियमित रुप से कर रहे हैं। उनसे अंग्रेजी सीखने वालों में गरीब घरों के छात्र, फेरी लगाने वाले दुकानदार, फुटपाथ किनारे बैठकर रोजी कमाने वाले मजलूम से लेकर पुलिसवाले तक शामिल हैं।

अपने जुनून के बारे में आदित्य बताते हैं कि वे मूलरुप से जनपद फर्रुखाबाद के रहने वाले हैं और रोजगार की तलाश में लगभग 15 साल पहले लखनऊ आ गये थे। रोजगार के तौर पर उन्हें यहॉं ट्यूशन पढ़ाना पड़ा। आदित्य बताते हैं कि वे एक दलित परिवार से हैं इसलिए आज के समाज में जितनी भी सामाजिक विसंगतियॉं दलितों को लेकर हैं, आदित्य को भी वह सब झेलना पड़ा है और आज भी झेल रहे हैं। वे कहते हैं कि सामाजिक प्रताड़ना ने ही मुझे प्रेरित किया कि गरीब लोगों को अगर ठीक से अंगरेजी शिक्षा मिल जाय तो गरीबी दूर करने की अपनी लड़ाई को वे बेहतर ढ़ॅग से लड़ सकते हैं। उनका प्रयास इसी दिशा में है।

आदित्य ने अपनी सायकिल में एक छोटा सा पी.ए.एस. यानी पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगा रखा है और बैनर भी। वे लोगों को इसी लाउडस्पीकर से आकर्षित कर अपनी बात बताते हैं और अगर अंग्रेजी सीखने वाले ज्यादा लोग हो जाते हैं या सड़क पर शोरगुल ज्यादा होता है तो इसी से लोगों को पढ़ाते भी हैं। उनके इस अभिनव समाज सेवा के कारण अब लोग उन्हें सायकिल टीचर, गरीबों का शिक्षक और ऑन रोड अंग्रेजी शिक्षक कहने लगे हैं। वे बताते हैं कि उन्होंने इस तरह के काम में आ रही दिक्कतों और अपने अनुभव के आधार पर कई तरह का पाठ्यक्रम भी बना रखा है और जिस तरह के प्रशिक्षु होते हैं उन्हें उसी मुताबिक शिक्षा देते हैं। आदित्य बताते हैं कि वे एक वीडियो कैमरा भी रखते हैं और उससे तमाम जरुरी चीजों को रिकॉर्ड कर उसका पढ़ाई में इस्तेमाल करते हैं।

‘‘काम तो बहुत कठिन है?’’ पूछने पर आदित्य कहते हैं कि लगन हो तो कठिन काम भी आसान लगने लगता है, और फिर यह तो समाजसेवा है और खास बात यह है कि इससे उन्हें बहुत सुकून मिलता है। ‘‘सड़क किनारे ऐसा भीड़ वाला काम करने में काफी अड़चन आती होगी?’’ इसके जवाब में आदित्य कहते हैं कि कभी-कभी होती है लेकिन अब उन्हें इस बात का तजुर्बा हो गया है कि उन्हें अपनी क्लास कहॉ लगानी चाहिए। वे बताते हैं कि अब तो उन्हें काफी लोग पहचानने लगे हैं और देखते ही उनके पास इकठ्ठा हो जाते हैं।

आदित्य मिसाल हैं समाज निर्माण के जज़्बे के। उनके इस प्रयास में जिससे जैसी भी मदद बन पड़े करनी ही चाहिए। वे बिल्कुल ही साधनहीन हैं लेकिन साधनवालों से ज्यादा कारगर ढ़ॅग से अपना काम कर रहे हैं। उनसे अंग्रेजी सीखने वाले प्रायः गरीब ही होते हैं इसलिए वे सब कॉपी-किताब भी नहीं खरीद सकते। लखनऊ में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाऐं आदित्य के कामों का ऑकलन कर उनकी कुछ मदद कर सकें, ऐसी अपील है। आदित्य से सम्पर्क करने का माध्यम है --- फोन: 09305744452                     

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