मशहूर फिल्म निर्माता समीर खान के घर के बाहर गेट पर पत्रकारों का हुजूम लगा हुया था | लोगों से घीरे खानजी से किसी ने तीखी आवाज़ में पूछा, " खान साहब आपके बेटे को कल पुलिस ने नशे में रेव पार्टी से पकड़ लोकप में रखा है, क्या कहना है इसपर आपका ? "

अपने बेटे की गलतियों पर पर्दा डालते हुए खान ने झुनझुलाते हुए कहा, " अजी माहौल ही खराब है, सोसायटी बिगड़ी हुयी है, आस - पास के लोगों का असर है |
लोग अपने मतलब के लिए सोसायटी का ख्याल रखे बगैर कुछ भी धंधा करते हैं और यह उसका नतीजा है | "

इतने में किसी दूसरे पत्रकार ने पीछे से आवाज़ लगाए, " सूना है आपकी सी - ग्रेड मूवि दिल्ली की बिल्ली अच्छा पैसा बटोर रही है " ?
इसपर इकठ्ठा हुए लोग हंस पड़े और खान की भौंहे तन गयी|

10 comments:

  1. मुम्बई में हुए बमधमाकों के समय इन अभिनेताओं के असली चेहरे सामने आये। एक ओर लाशे बिछी हुई थी तो दूसरी ओर कोई फैशन शो देख रहा था तो कोई पार्टी कर रहा था। लघुकथा अच्छी है अवनीश जी। अंत को थोडा और निखारिये।

    जवाब देंहटाएं
  2. यह तो बॉलिवुड के सभी खानों की कॉमन कहानी है :)

    जवाब देंहटाएं
  3. मन की बात कह दी भाईसाहब

    जवाब देंहटाएं
  4. अच्छी लघुकथा..सही जगह चोट की है।

    जवाब देंहटाएं
  5. व्यंग्य काम कर रहा है।

    जवाब देंहटाएं
  6. मित्रों,

    यह लघुकथा "delhi belly" फिल्म और उसके सामाजिक पक्ष पर है |


    अवनीश तिवारी

    जवाब देंहटाएं
  7. अवनीश नें नें फिल्म डेलीबेली के सामाजिक पक्ष की ओर ध्यान खीचने की बात कही है। सोचने की बात यह है कि सामाजिक स्वीकार्यता एसी फिल्मों या कि सोच को क्यों मिल जाती है?

    जवाब देंहटाएं
  8. जहाँ तक मै समझता हूँ, फिल्में भी परम्परा की दृष्टि से नाट्य-साहित्य का ही एक रूप हैं और साहित्य (स+हित) को समाज के हित की भावना से अनुप्राणित होना आवश्यक है. कला को समाज से अलग सिर्फ कला के उद्देश्य से होने की वकालत करने वालों को यह याद रखना होगा कि समाज के बिना कला महत्वहीन ही नहीं निर्जीव भी हो जायेगी.

    जवाब देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Get widget