HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

मच्छर जी! [बाल कविता] - शशांक मिश्र "भारती"


मच्छर जी ओ मच्छर जी,
इतना मुझे सताओ ना..!
रोज रात को काट-काट,
मुझको बेहाल बनाओ ना।

पूछे बिना न घर में आओ,
अपने को समझाओ ना
जब आती हो नींद मुझे..,
कान में गीत सुनाओ ना।

गांव-गली, घर-बस्ती में
ऊधम बड़ा मचाते हो,
मच्छर दानी के भी अन्दर
चोरों सा घुस आते हो।
तुम तो लगते प्यारे चाचा,
मुझको इस तरह सताओ ना।
आदत छोड़ो काटने की तुम
कान में शोर मचाओ ना॥

एक टिप्पणी भेजें

3 टिप्पणियाँ

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...