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झूलन पधारो अब बेगि प्राण प्यारे [ब्रजभाषा, घनाक्षरी छन्द] - नवीन सी चतुर्वेदी


परम पुनीत, नीक, देह बगिया के बीच,
जोबन को ब्रिच्छ, कन - कन रस भीनों है|

ता पर की नेह डार, पल्लव सु प्रीत पुंज,
कुंज छाँह लटन की, आनंद नवीनों है|

लगन की डोर पुस्ट, भनें 'कविदास' जा में,
दृगन के फंद, पाट - हृदय कों कीनों है|

झूलन पधारो अब, बेगि प्रान प्यारे तुम,
रति सों रंगाय, ऐसो - झूला डार लीनों है||

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3 टिप्पणियाँ

  1. झूलन पधारो अब, बेगि प्रान प्यारे तुम,
    रति सों रंगाय, ऐसो - झूला डार लीनों है||

    भूले बिसरे गीत से लगते हैं अब छंद।

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