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बात कहने की धुन [कविता] - श्यामल सुमन


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बात कहने की धुन गीत लिखने की धुन,
जिन्दगी है खुशी गम को सहने की धुन।
है कहाँ वश में कुछ हौसला के सिवा,
बन पतंगा मुहब्बत में जलने की धुन।।

रास्ते में पहाड़ी है दरिया कभी,
सामना जिन्दगी में तो करते सभी।
ये समन्दर की लहरें सिखाती हैं क्या,
जूझकर के सदा दिल में बढ़ने की धुन।।

भले फिसलन सही जो पिछड़ता नहीं,
ठंढ़ भीषण भी हो तो सिकुड़ता नहीं।
एक इन्सान सच्चा कहें हम किसे,
जिन्दगी में हो चढ़ने उतरने की धुन।।

जब कि कुदरत ने सबको है सींचा यहाँ,
कौन ऊँचा यहाँ कौन नीचा यहाँ।
कैसे आँगन में दीवारें तन के खड़ी,
दूरियों से हमेशा निबटने की धुन।।

लोग अपने सभी हो न दिल में जलन,
राह ऐसे चले जो उसी को नमन।
वो सुमन तो हमेशा ही बेचैन है,
जिसे बेहतर फिजा में है सजने की धुन।।

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