अगर ज़िंदगी काया है तो
उपटन हैं त्यौहार
शाश्वत जीवन दर्शन का
अवगाहन हैं त्यौहार

विकल ह्रदय में संबल जागे
थका बदन भी सरपट भागे
कैसा भी हो कोई निठल्ला
त्यौहारों में 'हिल्ले' लागे
निज रूचि के अनुसार सभी को
देते हैं रुजगार
इसीलिये तो कहते हैं
दुःख-भंजन हैं त्यौहार

चौखट पर जब आते उत्सव
खुशियों को बरसाते उत्सव
नारी और गृहस्थी का
औचित्य-सार समझाते उत्सव
जीवन की खुशहाली का
हैं यही सही आधार
जगतीतल में रिश्तों का
अभिनन्दन हैं त्यौहार

इनसे ही जीवन में रति है
संस्कार- सौहार्द सुमति है
इनके बिना स्थूल है जीवन
ये हैं तो जीवन में गति है
इनकी महिमा अद्भुत, अनुपम,
अविचल, अपरम्पार
प्रगति पंथ परिवृद्धि हेतु
प्रोत्साहन हैं त्यौहार

धर्मों का संकाय हिंद है
तत्वों का अभिप्राय हिंद है
सुविचारों का प्रथम प्रणेता
पर्वों का पर्याय हिंद है
विश्व गुरु का मान तभी तो
देता है संसार
मानव में मौज़ूद ईश का
वंदन हैं त्यौहार


3 comments:

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget