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मनोज बाजपेयी की लंका [साक्षात्कार] - राजीव रंजन प्रसाद



मनोज बाजपेयी की नयी फिल्म लंका अपने बोल्ड सब्जेक्ट और सशक्त अभिनय के लिये निश्चित ही मील का पत्थर बनेगी। मनोज बाजपेयी नें असाधारण अभिनय तो किया ही है वे स्वयं भी इस फिल्म को इस साल की सबसे अच्छी फिल्मों में गिनते हैं। फिल्म मानव सम्बन्धों की जटिलताओं के ताने बाने में गुथी हुई है और वह वासना पर बिना शर्त प्यार जीत को दिखाती है। प्रस्तुत है मनोज बाजपेयी से एक बातचीत - 

राजीव रंजन - एक साक्षात्कार में आपने फिल्म लंका को साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म की संज्ञा दी है, इसका कोई खास कारण?

मनोज बाजपेयी-  जब तक किसी फिल्म को साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म नहीं मानूंगा तब उसको करूंगा ही क्यों? तो मैने वही बात की है जो हर अभिनेता कहता है। जब भी मैं कोई फिल्म करता हूँ तो यह मान कर चलता हूँ कि ये मेरे लिये दुनियाँ की सबसे बेहतरीन फिल्म है। इस लिये यह मैने अपनी बात कही है।

राजीव रंजन - क्या वो तत्व मैं जान सकता हूँ जिसके कारण दर्शक भी यह सोचें कि वे साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म देखने जा रहे हैं? 

मनोज बाजपेयी – सर्वश्रेष्ठ नहीं कहेंगे, हाँ साल की बहुत अच्छी फिल्म है। सर्वश्रेष्ठ मैंने कभी नहीं कहा लेकिन हाँ साल की बहुत अच्छी फिल्म है, जितनी फिल्में मैंने देखीं। ओरीजनल कहानी है जिसमें रामायण के अलावा विभीषण के सम्बन्धों को आज के युग में तलाशने की कोशिश की गयी है।

राजीव रंजन – आपकी फिल्म राजनीति महाभारत से प्रेरित थी और लंका में रामायण का प्रभाव? क्या मनोज बाजपेयी की ये फिल्में किसी पैटर्न का इशारा करती हैं?

मनोज बाजपेयी – नहीं किसी पैटर्न की नहीं। फिल्म मनोज बाजपेयी की नहीं होती है वह निर्माता और निर्देशक की फिल्म होती है। मैं बस गाहे बे-गाहे उसका हिस्सा हो जाता हूँ। जब भी कहानी अच्छी लगती है और किरदार अच्छा लगता है मैं उसको करने की हामी भर देता हूँ।

राजीव रंजन - लगातार नकारात्मक चरित्र भूमिका निभाने को नायक मनोज किस तरह देखता है?

मनोज बाजपेयी - नकारात्मक और सकारात्मक अब समाज में रहा नहीं। नकारात्मक और सकारात्मक दोनो ही आज इंसान के अंदर हैं। दोनों की परिभाषाये बदल चुकी हैं। बदलते समाज के साथ, बदलती परिभाषाओं के साथ एक नायक को भी किरदारों के चुनाव में उसका ध्यान रखना पड़ता है।

राजीव रंजन-कई किरदार नये हैं और निर्देशक मकबूल खान की भी यह डेब्यू फिल्म है। इस फिल्म में और क्या नयापन है?

मनोज बाजपेयी – जैसा मैंने कहा सब्जेक्ट नया है, उसकी कहानी नयी है, मकबूल खान नये हैं और उनका ट्रीटमेंट नया है। छोटे शहर की कहानी है, छोटी जगह की कहानी है।

राजीव रंजन - लंका के बाद की योजनायें? 

मनोज बाजपेयी- गैंग ऑफ वासेपुर आयेगी अनुराग कश्यप की उसके बाद चटगाँव अपराईजिंग आने वाली है।

राजीव रंजन - मनोज जी साहित्य शिल्पी से बात करने के लिये आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आपको फिल्म लंका और आने वाली फिल्मों के लिये भी हार्दिक शुभकामनायें।  

मनोज बाजपेयी- आपका भी धन्यवाद।

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फिल्म लंका से एक दृश्य - 


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4 टिप्पणियां

  1. लंका देख ही लेते हैं। मनोज बाजपेयी की फिल्म एसे भी देखनी पड़ेगी।

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  2. मनोज जी को अपनी नई फिल्म के लिए बहुत बहुत शुभकामनाए।

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  3. मनोज जी को फिल्म की सफलता हेतु मेरी ओर से भी अनेकानेक शुभकामनायें

    जवाब देंहटाएं

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