HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

फागुनी गीत [गीत] - शकुंतला तरार


बहे बासन्ती बयार, मन हुआ बेक़रार ,
छूटे रंगों की फुहार घर अंगना
फागुन आज गली मेरे आना !!

अलियों की करे पहुनाई
कलियों ने करी चतुराई
घूँघट पट खोल भरमाना
फागुन आज गली मेरे आना !!

फूटी डाली-डाली अरुणाई
शाखों पातों की तरुनाई
कोयलिया का रह-रह शरमाना
फागुन आज गली मेरे आना !!

बाजे ढोलक-झांझ मंजीरा
गावे राग बसंत फकीरा
फाग गाकर मन को लुभाना
फागुन आज गली मेरे आना !!

टिप्पणी पोस्ट करें

5 टिप्पणियां

  1. होली की हार्दिक शुभकामना। बहुत सुन्दर होली गीत।

    जवाब देंहटाएं
  2. बाजे ढोलक-झांझ मंजीरा
    गावे राग बसंत फकीरा
    फाग गाकर मन को लुभाना
    फागुन आज गली मेरे आना !!

    जवाब देंहटाएं
  3. बधाई शकुंतला जी अच्छा गीत है। होली की शुभकामनायें।

    जवाब देंहटाएं
  4. निधि अग्रवाल जी,नितेश जी, रितु रंजन जी आप सबका आभार आपने होली गीत पसंद किया .

    जवाब देंहटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...