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रक्षाबन्धन पर 'डॉ सरस्वती माथुर' के 'हाइकु'


रिश्तों की डोरी
 भाई की कलाई पे
 बहने  बांधे

===

रेशमी धागा
आत्मीयता  सहेज
रिश्तों में बंधा

===

बाबुल चौरे
अनुराग डोरी ले
बहना आई

===

भाई की आँखें
भीगी भीगी सी
रक्षा पर्व पे

===

परदेस में
भीगी भाई की आँखे
रक्षा पर्व पे

===

प्रचंड धूप
घनी छाँव सा लगे
भाई का प्यार

===

कलाई पर
भाई के बांधा एक
रक्षा का सूत

===

राखी की मौली
पूजा थाली में लेके
बहनें आयीं

===

राखी पर्व पे
धागों के दीप जले
मन है बाती

==

बहने हैं होती
अनुभूति से भरी
मिश्री -मिठास

===

शुभ- मुस्कान
रिश्ते की घनी छाँव
रक्षाबंधन

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7 टिप्पणियां

  1. कल 02/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. प्यारे-प्यारे भावों से भरे छोटे-छोटे हाइकू सचमुच बहुत ही अच्छे हैं.... आपको रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!

    जवाब देंहटाएं
  3. जापानी हाइकू में लय बद्धता है उसका आभाव, रचना में भाव प्रवणता होते हुए भी खटक रहा है...रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!

    जवाब देंहटाएं
  4. रक्षा बंधन के उपलक्ष में बहुत सुन्दर हाइकु रचे हैं आपने बधाई एवं शुभकामनाये सरस्वती जी

    जवाब देंहटाएं
  5. लयबद्धता के साथ साथ पूर्णत भावपूर्ण हाइकु हैं- रक्षा बंधन पर बहुत- बहुत बधाई डॉ सरस्वती माथुर को !

    राजलक्ष्मी

    जवाब देंहटाएं

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