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देस-परदेस में बर्तोल्त ब्रेख़्त की कविता - 'अध्यापक'



अध्यापक..
अक्सर मत कहो कि तुम सही हो,
छात्रों को उसे महसूस कर लेने दो
ख़ुद-ब-ख़ुद।

सच को थोपो मत..
यह ठीक नहीं है सच के हक़ में,
बोलते हो जो, उसे सुनो भी !!!

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4 टिप्पणियां

  1. आज के दिन और सदैव - एक विशेष भावपूर्ण कविता

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  2. Ek Bahv purn samvad ! Yahan Saudi Arab Me Hindi Sahitya se Rubaru Hona, Maruthal me Ek Nakhlistaan pa lene ke manind he ! Agar Sambhav Ho To Wo Patra Avashya chhape jo Abraham Lincon ne Apane Bete Ke Teacher Ko Likha tha.

    जवाब देंहटाएं
  3. sach or guru shishy ki atmiyataa prakat karti rachnaa.....

    जवाब देंहटाएं

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