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स्वाहा [लघुकथा] - शशि पुरवार



रामू चाय की दुकान पर काम करता था  पढने का बहुत शोक था  दिन में काम करता  और रात के समय पढता था , पिता ने उसे काम करने के लिए कहा था ,वह कहते थे की पढने से पैसे नहीं मिलते ,पर झुग्गी छोपडी में एक स्कूल था जो मुफ्त शिक्षा देता था ,तो रामू की लगन से वहां उसे दाखिला मिल गया था ,सिर्फ परीक्षा के समय पैसे भरने होते थे फॉर्म के ,तो रामू के पिता ने उसे कह दिया 
" ठीक है देखेंगे.......... "
हर महीने की पगार वह आजकर रामू के सेठ से ले जाते थे .आज कप धोते धोते रामू को याद आया कि कल स्कूल में कहा गया है कि  अगर आज रूपये नहीं भरे तो परीक्षा नहीं दे सकते  . उसने सेठ से कहा 
 काका जल्दी से आता हूँ घर से .........वह घर की तरफ भागा ,और अपने पिता से बोला --
" बाबा फ़ीस भरनी है आज ,"
" पैसे नहीं है मेरे पास ............. पता नहीं  सा पहाड़ मिल जायेगा पढ़ कर .."कड़कती आवाज में जबाब आया ,फिर वह सड़क पर निकल गए .

रामू को कुछ समझ नहीं आया ,आँखों में आंसू आ गए , सोचा रात को अम्मा  से कहूँगा ,नहीं तो स्कूल वाले भगा देंगे स्कूल से ,
रात को जब  अम्मा घर आई कुछ कह पाता ,पिता शराब की बोतल पिटे हुए लडखडाते ,गन्दी गलियां देते हुए घर में खुसे , आज सन्नाटा सा छा गया झोपड़ी में .........आज खाने में लात घुसे ही मिले , और आँखे अविरल सिर्फ पानी बहा रही थी , एक खामोश चीत्कार थी रामू के मन में .सब कुछ अब समाप्त होने को है , आशाएं , इक्छाएं  धू धू कर जल रही थी . शराब में सब कुछ स्वाहा  हो गया ..

------शशि पुरवार ( shashi purwar )

संपर्क -- 02572240508
(मो )- 09420519803
shashipurwar@gmail.com
 

रचनाकार परिचय:-


शशि पुरवार, इंदौर ( म. प्र.)
प्रकाशन  ------ कई समाचार पत्रों और पत्रिकाओ राष्ट्रीय पत्रिका में रचनाए  ,लेख , लघुकथा ,  कविता का  प्रकाशन होता रहता है . दैनिक भास्कर , बाबूजी का भारत मित्र , समाज कल्याण पत्रिका , हिमप्रस्थ , साहित्य दस्तक , लोकमत , नारी जाग्रति ........आदि .अनगिनत पत्र व  पत्रिकाओ में प्रकाशन .
        
बचपन से ही साहित्य के प्रति रुझान रहा है .प्रथम कविता 13 वर्ष की उम्र में लिखी ,प्रथम रचना लिखने के बाद जो अनुभूति हुई  उसने कलम को जीवन का अभीन्न अंग बना लिया . विचार और संवेदनाए  शब्दों के माध्यम से पन्नो पर जीवन के अलग अलग रंग बिखरने लगे .साहित्यिक विरासत माँ ( श्री मति मंजुला गुप्ता) से मिली . जीवन भर विद्यार्थी रहना ही पसंद है . रचनात्मकता और कार्य शीलता ही पहचान है . लेखन करने का एकमात्र यही उदेश्य है कि समाज के लिए कुछ कर सकूं , एक दिशा प्रदान कर सकूं .कहानी , कविता , लघुकथा , काव्य की अलग अलग विधाए , गीत , दोहे , कुण्डलियाँ ,  गजल ,छन्दमुक्त, तांका , चोका ,माहिया  और लेखों के माध्यम से जीवन के बिभिन्न रंगों को उकेरना पसंद है 
कविता दिल व आत्मा से निकली हुई आवाज होती है ,एवं शशि का अर्थ  है चाँद तो चाँद की तरह शीतलता बिखेरने का नाम है जिंदगी .

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