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बुला कर घर में हर इक अजनबी को [ग़ज़ल] - प्राण शर्मा

GulzarPoetry4

Pran Sharmaरचनाकार परिचय:-


प्राण शर्मा वरिष्ठ लेखक और प्रसिद्ध शायर हैं और इन दिनों ब्रिटेन में अवस्थित हैं। आप ग़ज़ल के जाने मानें उस्तादों में गिने जाते हैं। 

आप के "गज़ल कहता हूँ' और 'सुराही' काव्य संग्रह प्रकाशित हैं, साथ ही साथ अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं।

बुला कर घर में हर इक अजनबी को 
न डाला कर तू ख़तरे में खुदी को 

बहुत देखे हैं मैंने लोग ऐसे 
तरसते रहते हैं जो दोस्ती को 

बगीचे की सजावट उनसे ही है 
सराहें क्यों न हम हर इक कली को 

चलेगा उसका जादू हर किसी पर 
सजा कर देख प्यारे ज़िंदगी को 

न जाने किस जहां में खो गई है 
चलो, हम ढूँढ लाएं सादगी को 

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3 टिप्पणियाँ

  1. न जाने किस जहां में खो गई है
    चलो, हम ढूँढ लाएं सादगी को

    बहुत खूब सर , क्या बात है .
    एक छोटे से शेर में आपने ज़िन्दगी का फलसफा कह दिया ..
    सलाम कबूल करे सर.
    आपका अपना विजय

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी यह गजल मन को छू गयी,जिससे गुजरना एक सुकून भरे अहसास को महसूस करने जैसा है,
    न जाने किस जहां में खो गयी है
    चलो,हम ढूंढ लायें सादगी को.
    बेहतरीन अंदाज,बधाई

    जवाब देंहटाएं

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