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मैं समय हूँ [कविता] - आचार्य बलवन्त

Waqt-Faiz
मैं कौन हूँ,
इसे वही बता सकता है,
जिसने मैं को जिया हो,
मैं को चखा हो,
मैं को पिया हो।

WRITER NAMEरचनाकार परिचय:-


उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के एक गाँव ’जूड़ी’ में जन्मे आचार्य बलवन्त वर्तमान में बैंगलूरु के एक कालेज में हिन्दी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
आपका एक काव्य-संग्रह "आँगन की धूप" प्रकाशित हो चुका है। इसके अतिरिक्त आपकी कई रचनाएं समय समय पर अहिंसा तीर्थ, समकालीन स्पन्दन, हिमप्रस्थ, नागफनी, सोच-विचार, साहित्य वाटिका, वनौषधिमाला आदि पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में भी प्रकाशित होती रही हैं। आपकी कुछ रचनाएं आकाशवाणी जलगाँव और बंगलूरु से भी प्रसारित हुई हैं।

मैं कौन हूँ? इसे मैं जानता हूँ
मैं को ‘मैं’ पहचानता हूँ।
मेरी पहचान औरों से नहीं है,
अपनी पहचान मैं स्वयं को मानता हूँ।
मैं ही मूल हूँ विस्तार का,
बनते-बिगड़ते आकार का,
दिन-रात तो मेरी प्रवृत्तियों के प्रक्षेपण हैं,
मैं रुकता नहीं, अनवरत चलता हूँ,
मैं मिटता नहीं, बदलता हूँ,
मैं टूटता नहीं, पिघलता हूँ,

मैं ‘मैं’ हूँ, मैं समय हूँ।
मैं कृष्ण हूँ, क्राइस्ट हूँ, राम हूँ,
अद्वैत हूँ, अनाम हूँ।
तीर्थ हूँ, धाम हूँ,
मैं ही मैं का आयाम हूँ।
मैं ‘मैं’ हूँ, मैं समय हूँ।

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2 टिप्पणियां

  1. बलवंत जी,
    आपकी कविता पढ़ी. पढ़कर हैरान हूँ. व्यक्ति के ' मैं ' को पहचनवाने के लिए ओशो ने लगभग छै-सात सौ पुस्तकें (प्रवचन के माध्यम से) दुनिया के सामने प्रस्तुत कर डालीं उस मैं को आपने राह चलते पहचान लिया.

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