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वादा [लघुकथा] - रचना व्यास

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उसके बीवी बच्चे नहीं थे | इसलिए सब उसके अपने थे | जब जिसने काम बताया निस्वार्थ भाव से कर दिया |

रचना व्यासरचनाकार परिचय:-



रचना व्यास मूलत: राजस्थान की निवासी हैं। आपने साहित्य और दर्शनशास्त्र में परास्नातक करने के साथ साथ कानून से स्नातक और व्यासायिक प्रबंधन में परास्नातक की उपाधि भी प्राप्त की है।

न जाने इतना सेवाभाव व समर्पण वह कैसे अर्जित कर पाया था | हर रविवार को कैंसर रोगियो की देखभाल करना वर्षो से उसकी दिनचर्या का शुमार था | हर रोगी को उसकी दुलार रुपी खुराक असीम सांत्वना दे जाती | पैंतीस वर्षीया उस संभ्रांत महिला को फेफड़ो का कैंसर था | साँस मुश्किल से आता | अधिकांश समय टेबल पर गुजरता | वो हताश थी कि उसकी सगी बहन उससे पंद्रह मिनट तक दूर से बतिया कर औपचरिकता निभा गई | वह उसका सगा नहीं था फिर भी उसके खांसते समय बाहर आये कफ को उसने अपनी हथेली पर ले लिया | अभिभूत -सी वह बोल पड़ी , "भैया वादा करो अगले जन्म में आप मेरे बेटे बनोगे | "

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