HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

फेलुन [गज़ल]- सुशील यादव

IMAGE1
मकसद हो तो आना जाना अच्छा लगता है
निभ जाए तो वफा ,निभाना अच्छा लगता है


 सुशील यादव रचनाकार परिचय:-



यत्रतत्र रचनाएं ,कविता व्यंग गजल प्रकाशित | दिसंबर १४ में कादम्बिनी में व्यंग | संप्रति ,रिटायर्ड लाइफ ,Deputy Commissioner ,Customs & Central Excise ,के पद से सेवा निवृत, वडोदरा गुजरात २०१२ में सुशील यादव New Adarsh Nagar Durg (C.G.) ०९४०८८०७४२० susyadav7@gmail.com

चारागर से मिल पूछूंगा ,टालने का अंदाज
किस मर्ज में कौन सा बहाना अच्छा लगता है

हम मुफलिस लोगों की ,सुनने वाला हो तो कह
वरना दर्दे दिल जिगर दबाना अच्छा लगता है

खुल के तू हंस नहीं पाती बीच सरे महफिल
बहुत दबे अंदाज ,मुस्स्काना अच्छा लगता है

तू बेकार की चीज सहेजे रहती है क्यों कर
मेरे लफ्जों में मुझे डुबाना अच्छा लगता है

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...