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निरादर का बदला [लघुकथा]- सविता मिश्रा

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"दिख रहीं हैं न चाँद सितारों की खूबसरत दुनिया |" आकाश में अदिति को टेलेस्कोप पर उसके शिक्षक दिखातें हुये बोलें |

सविता मिश्रारचनाकार परिचय:-



सविता मिश्रा o9411418621 w/o देवेन्द्र नाथ मिश्रा (पुलिस निरीक्षक ) फ़्लैट नंबर -३०२ ,हिल हॉउस खंदारी अपार्टमेंट , खंदारी आगरा २८२००२ पिता का नाम ..श्री शेषमणि तिवारी (रिटायर्ड डिप्टी एसपी ) माता का नाम ....स्वर्गीय श्रीमती हीरा देवी (गृहणी ) जन्म तिथि ...१/६/७३ शिक्षा ...बैचलर आफ आर्ट ...(हिंदी ,रजिनिती शास्त्र, इतिहास) अभिरुचि ....शब्दों का जाल बुनना, नयी चीजे सीखना, सपने देखना 'मेरी अनुभूति' परिलेख प्रकाशन से प्रकाशित पहला संयुक्त काव्यसंग्रह 'मुट्ठी भर अक्षर' पहला प्रकाशित साँझा लघुकथा संग्रह | 2012.savita.mishra@gmail.com

"देखो जो ये सात ग्रह पास पास हैं , वो 'सप्त ऋषि' हैं और जो सबसे चमक दार तारा उत्तर में हैं , वह 'ध्रुव तारा' | जिसने अपने निरादर का बदला, तप करके सर्वोच्च स्थान को पा कर लिया | " "सर हम अपने निरादर का बदला कब लें पाएंगे ? हर क्षेत्र में दबदबा कायम कर चुकें हैं फिर भी ध्रुव क्यों न बनें अब तक । " झुका सर उठाते हुये बोली शिक्षक का गर्व से उठा सर झुक सा गया ।......

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