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होठों पर [ग़ज़ल] - अनंत आलोक

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ख़ुशी की बात होठों पर ग़मों की रात होठों पर ,
चले आओ कि होने दो सनम बरसात होठों पर |


 अनन्त आलोक रचनाकार परिचय:-



अनन्त आलोक
साहित्यलोक , बायरी , ददाहू , सिमौर
हिमाचल प्रदेश 173022 Mob: 09418740772
Email: anantalok1@gmail.com

बड़ा जालिम जमाना है फँसा देगा सवालों में ,
मैं आने दे नहीं सकता तुम्हारी बात होठों पर |

नज़र की बात नैनों से फिसल कर दिल में आ धमकी ,
हुई जो बात नैनों से बनी सौगात होठों पर |

जुबां को लफ्ज देते हैं ग़ज़ल को भी नजाकत दी ,
अदम या जानवर हो तुम तुम्हारी जात होठों पर |

तेरा आलोक आशिक है ग़ज़ल से इश्क फरमाए ,
कलम की नोक पर या फिर मेरी औकात होठों पर |

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4 टिप्पणियां

  1. हृदयतल की गहराइयों से आभारी हूँ ,आपका स्नेह सर आँखों पर , अनन्त नमन स्वीकार करें

    जवाब देंहटाएं
  2. आप की लिखी ये रचना....
    रविवार 26/07/2015 को लिंक की जाएगी...
    http://www.halchalwith5links.blogspot.com पर....

    जवाब देंहटाएं
  3. खुबसूरत ग़ज़ल ...आलोक जी को बहुत -2 बधाई ....!

    जवाब देंहटाएं

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