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मुहब्बत वो तराना है [ग़ज़ल] - अनंत आलोक

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ये रिश्ते और ये शादी सभी केवल बहाना ....है ,
मुहब्बत वो तराना है जो सबको गुनगुनाना है |


 अनन्त आलोक रचनाकार परिचय:-



अनन्त आलोक
साहित्यलोक , बायरी , ददाहू , सिमौर
हिमाचल प्रदेश 173022 Mob: 09418740772
Email: anantalok1@gmail.com

चला है कौन सा नम्बर तुम्हारी आइडी है क्या ,
मुझे इतना बता देना तुम्हारा क्या ठिकाना ..है |

रहो तुम दूर ही बेशक मगर नेट पर बनी रहना ,
इसी पर बात करनी है इसी पर रूठ जाना... है |

हमारी याद आये तो फकत नेट पर चली आना ,
न मम्मी को खबर होगी न डेडी को बताना ...है |

यहीं दिल मिलन होता यहीं दिल टूट कर बिखरे ,
न कोई जान पाता है समय कितना सयाना.. है |

हुआ आलोक आशिक ये सभी से इश्क फरमाए ,
यही दौलत कमाई है गले सब को लगाना ....है |

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