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मिले थे दिल जहाँ दिल से [ग़ज़ल] - अनंत आलोक

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मिले थे दिल जहाँ दिल से वहीँ इक बार आ जाना,
मुहब्बत कितनी है हम से कसम तुमको बता जाना|


 अनन्त आलोक रचनाकार परिचय:-



अनन्त आलोक
साहित्यलोक , बायरी , ददाहू , सिमौर
हिमाचल प्रदेश 173022 Mob: 09418740772
Email: anantalok1@gmail.com

रही मजबूरियां होंगी वफ़ा हम कर नहीं पाए,
निभाया हमने हर रिश्ता सदा ही बा-वफ़ा जाना |

तुम्हारे हाथ की छूअन अभी तक हाथ में जिन्दा,
कि फिर इन हाथों में मेरे तू अपना हाथ पा जाना |

तुम्हारी बेरुखी अब तो हुई बर्दाश्त के बाहिर ,
कि हमसे हो गई है क्या खता इतना बता जाना |

तुम्हारी हर अदा मेरी ग़ज़ल का एक मिसरा है ,
मुकम्मल हो ग़ज़ल मेरी कमर थोड़ी हिला जाना |

करो तुम जो भी जी चाहे तुम्हारा मुआमला निजी ,
नहीं आलोक फितरत से कभी भी बे-वफ़ा जाना |

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