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बच्चो की दीवाली [बाल कविता]- डॉ राजीव श्रीवास्तव

देखो-देखो आइ दीवाली ,
ढेरो खुशियाँ लाई दीवाली ,
जग-मग जग-मग दीप जलाओ ,
प्यार जताओ ,गले लगाओ !


डॉ राजीव श्रीवास्तव रचनाकार परिचय:-



डॉ राजीव श्रीवास्तव
पापा नये कडपे सिलवाते ,
घर मे रंग रोगन करवाते ,
लक्ष्मी माँ का पैर बनालो ,
कई रंगो से उसे सजालो !

चीनी के हाथी और घोड़े ,
सब चख लेना थोड़े-थोड़े ,
मिट्टी का तोता भी लाओ ,
उसको अपने गीत सूनाओ !

कितनी सुंदर झालर और लाडियाँ ,
जल उठती ढेरो फूल्झड़ियाँ ,
गोल-गोल सी चरखी घूमे ,
राकेट उड़े आसमान को चूमे !

अपने हाथो से दीप जालाओ ,
लाइन मे रख कर रेल बनाओ ,
टिम-टिम कर के जलते सारे ,
कितने सुन्दर ,कितने प्यारे !

हर तरफ होता धूम धड़ाका ,
ज़ोर ज़ोर से बजता पटाखा ,
आनर से सब रोशन हो जाए ,
टिकिया जलाओ साँप बन जाए !

एक बात का रखना ध्यान ,
बता रहा हूँ अपना मान ,
जब भी पटाखा तुम जलाओ ,
बडो को अपने पास बुलाओ !

दीवाली मैं खूब मौज मनाओ ,
दुश्मन को भी गले लगाओ ,
हाथ मिला कर प्यार जताओ ,
"हैप्पी दीवाली" कह के आओ !

(सारे बच्चो को राजीव अंकल की तरफ से ढेर सारी शुभ कामनाए-हैप्पी दीवाली' आप सभी को)

डॉक्टर राजीव श्रीवास्तव

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