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लिख गया [कविता] - डॉ० राजीव जोशी

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काफ़िया-आनी
रदीफ़- लिख गया
मापनी-2122 2122 2122 212


 डॉ० राजीव जोशी रचनाकार परिचय:-



नाम- डॉ० राजीव जोशी
जन्म- १७ सितम्बर १९७७
माता- स्व० श्रीमती लक्ष्मी देवी
पिता- श्री खीमानन्द जोशी
ग्राम- भयेड़ी, पो०- क्वैराली, जनपद-बागेश्वर(उत्तराखंड)
शिक्षा- एम०एस०सी०(भौतिकी),एम०ए०(हिंदी, शिक्षा-शास्त्र)
बी०एड०,एल०एल-बी०,आइ०जी०डी०-बॉम्बे,पी-
एच०डी०(हिंदी), यू०जी०सी०नेट.
लेखन- हिमांशु जोशी: रूप एक रंग अनेक, विभिन्न राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं, समाचार पत्रों तथा ऑनलाइन जनरल्स(पत्रिकाओं) में कविताएं, लेख एवं शोध-पत्र प्रकाशित, कहानी लेखन.
शोध/आलेख- हिमांशु जोशी:कृतित्व के नए आयाम(हिमांशु जोशी के व्यक्तित्व एवं सम्पूर्ण कृतित्व तथा पत्रकारिता का शास्त्रीय अध्ययन), मध्य हिमालयी पहाड़ी की भाषिक संरचना, हिमांशु जोशी का बाल साहित्य, हिंदी वर्तनी की समस्याएं, देवसिंह पोखरिया का काव्य सौष्ठव, पत्रकारिता एवं हिमांशु जोशी, समकालीन कहानियों में व्यंग्य.
संप्रति- राजकीय इंटरकॉलेज हड़बाड़, जनपद-बागेश्वर, उत्तराखंड में भौंतिक विज्ञान प्रवक्ता पद पर कार्यरत.
ई-मेल rajeevbageshwar@gmail.com
फोन न०- ९६३९४७३४९१, ९४१२३१३७१७

देख पतंगे की रवानी 'वो' कहानी लिख गया
इश्क में जाँ को गँवाना ये निशानी लिख गया ||1||

मुल्क का भी है हक़ तुझपर' कुछ तो कर जा यहाँ
देश के जो काम आए है जवानी लिख' गया ||2||

बात बीती हो चुकी जो दे यहीं उसको हटा
आ रही है फिर' यहाँ वो रुत' सुहानी लिख गया ||3||

अश्क आँखों से निकल कर यूँ जमे हैं शान पर
ख्वाब में शायद' 'वही' भूली कहानी लिख गया ||4||

पूर्णिमा का चाँद था फिर क्यों 'अमासी' हो गया
क्या हुआ था रात भर ये सब बयानी लिख गया ||5||

कौन देखे दाग दिल के कौन गाए फलसफा
बात 'राजीव' दिल की ये मुँह-जुबानी लिख गया ||6||

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2 टिप्पणियां

  1. पूर्णिमा का चाँद था फिर क्यों 'अमासी' हो गया
    क्या हुआ था रात भर ये सब बयानी लिख गया ||
    ..बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
  2. फेसबुक पर

    Nitin Sinha, Lnsingh Thakur, Yogendra Singh और 13 अन्य को यह पसंद है.
    टिप्पणियाँ
    Tomesh Pradhan
    Tomesh Pradhan अति सुन्दर रचना
    पसंद · जवाब दें · 30 दिसंबर 2015 को 06:53 अपराह्न बजे
    S.p. Shrivastry
    S.p. Shrivastry Thanx rajeev. iski upyogita fb ke madyam se mil rahi.aapke aati sunder vichar.
    पसंद · जवाब दें · 31 दिसंबर 2015 को 12:07 पूर्वाह्न बजे

    जवाब देंहटाएं

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