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कुंडलियाँ-5 - महावीर उत्तरांचली

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(21.) जो भी देखे प्यार से


 महावीर उत्तरांचली रचनाकार परिचय:-



१. पूरा नाम : महावीर उत्तरांचली
२. उपनाम : "उत्तरांचली"
३. २४ जुलाई १९७१
४. जन्मस्थान : दिल्ली
५. (1.) आग का दरिया (ग़ज़ल संग्रह, २००९) अमृत प्रकाशन से। (2.) तीन पीढ़ियां : तीन कथाकार (कथा संग्रह में प्रेमचंद, मोहन राकेश और महावीर उत्तरांचली की ४ — ४ कहानियां; संपादक : सुरंजन, २००७) मगध प्रकाशन से। (3.) आग यह बदलाव की (ग़ज़ल संग्रह, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से। (4.) मन में नाचे मोर है (जनक छंद, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से।

जो भी देखे प्यार से, दिल उस पर कुर्बान
जग में है यह प्रेम ही, सब खुशियों की खान
सब खुशियों की खान, करो दिलबर की पूजा
है प्रभु का वह रूप, नहीं प्रेमी-सम दूजा
महावीर कविराय, तनिक अब वो भी देखे
दे दो उस पर जान, प्यार से जो भी देखे

(22.) सारी भाषा बोलियाँ

सारी भाषा बोलियाँ, विद्या का है रूप
विश्व में चहूँ ओर ही, खिली ज्ञान की धूप
खिली ज्ञान की धूप, रूप है इसका न्यारा
अक्षर ने हर छोर, किया ऐसा उजियारा
महावीर कविराय, विज्ञानं नहीं तमाशा
एक जगह अब देख, यंत्र में सारी-भाषा

(23.) जीवन हो बस देश हित

जीवन हो बस देश हित, सबका हो कल्याण
"महावीर" चारों तरफ, चलें प्यार के वाण
चलें प्यार के वाण, बने अच्छे संस्कारी
उत्तम शासन-तंत्र, बने अच्छे नर-नारी
देश-भक्त की राय, फूल-सा मन उपवन हो
हर विधि हो कल्याण, देश हित हर जीवन हो

(24.) कूके कोकिल बाग़ में

कूके कोकिल बाग़ में, नाचे सम्मुख मोर
मनोहरी पर्यावरण, आज बना चितचोर
आज बना चितचोर, पवन शीतल मनभावन
मृत्युलोक में मित्र, स्वर्ग-सा लगता जीवन
महावीर कविराय, युगल प्रेमी मन बहके
काश! डाल पे आज, ह्रदय कोकिल बन कूके

(25.) रंगों का त्यौहार है

रंगों का त्यौहार है, उड़ने लगा अबीर
प्रेम रंग गहरा चढ़े, उतरे न महावीर
उतरे न महावीर, सजन मारे पिचकारी
सजनी लिए गुलाल, खड़ी कबसे बेचारी
प्रेम रंग के बीच, खेल चले उमंगों का
जग में ऐसा पर्व, नहीं दूजा रंगों का

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3 टिप्पणियां

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " डरो ... कि डरना जरूरी है ... " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    जवाब देंहटाएं
  2. जीवन हो बस देश हित, सबका हो कल्याण
    "महावीर" चारों तरफ, चलें प्यार के वाण
    चलें प्यार के वाण, बने अच्छे संस्कारी
    उत्तम शासन-तंत्र, बने अच्छे नर-नारी
    देश-भक्त की राय, फूल-सा मन उपवन हो
    हर विधि हो कल्याण, देश हित हर जीवन हो .....

    मेरा भारत महान.....जय हिंद

    जवाब देंहटाएं

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