HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

ख़मोशियां ही ख़मोशियां हैं [गज़ल] - चेतन आनंद

IMAGE1
ख़मोशियां ही ख़मोशियां हैं, हमारे दिल में, तुम्हारे दिल में।
उदासियां ही उदासियां हैं, हमारे दिल में, तुम्हारे दिल में।।




चेतन आनंद
रचनाकार परिचय:-



चेतन आनंद
426\S-1 शालीमार गार्डेन एक्स्टेशन .-1
साहिबाबाद , गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश )
फोन नं .:- 08586053956, 9711808485
ई मेल :- av.chetan2007@gmail.com

हमें यक़ीं हैं गिरा ही लेंगीं, ये नफरतों के दरख़्त सारे,
दबी-दबी-सी जो आंधियां हैं, हमारे दिल में, तुम्हारे दिल में।।

ये पूरी दुनिया भी इक नदी है, चलो कि इसमें उतार दें हम,
ये जो ख़यालों की कश्तियां हैं, हमारे दिल में, तुम्हारे दिल में।।

कि अपनी सांसों को आंच दे दो, इन्हें बरफ-सी जमा न दें, ये-
घुली-घुली-सी जो सर्दियां हैं, हमारे दिल में, तुम्हारे दिल में।।

इन्हें भी थोड़ा संवार लें हम, इन्हें भी दे दें दिशा नई-सी,
नये ज़माने की बिजलियां हैं, हमारे दिल में, तुम्हारे दिल में।।

- चेतन आनंद

एक टिप्पणी भेजें

4 टिप्पणियाँ

  1. रमेश कुमार25 मार्च 2016 को 10:06 am

    ये पूरी दुनिया भी इक नदी है, चलो कि इसमें उतार दें हम,
    ये जो ख़यालों की कश्तियां हैं, हमारे दिल में, तुम्हारे दिल में।।

    वाह....

    जवाब देंहटाएं
  2. चेतन आनंद जी,
    आपकी "ख़मोशियां ही ख़मोशियां हैं" ये गज़ल अच्छी लगी.
    धन्यवाद्

    जवाब देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...