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कुंडलियाँ-8 - महावीर उत्तरांचली

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(36.) अनपढ़ सदा दुखी रहा

 महावीर उत्तरांचली रचनाकार परिचय:-



१. पूरा नाम : महावीर उत्तरांचली
२. उपनाम : "उत्तरांचली"
३. २४ जुलाई १९७१
४. जन्मस्थान : दिल्ली
५. (1.) आग का दरिया (ग़ज़ल संग्रह, २००९) अमृत प्रकाशन से। (2.) तीन पीढ़ियां : तीन कथाकार (कथा संग्रह में प्रेमचंद, मोहन राकेश और महावीर उत्तरांचली की ४ — ४ कहानियां; संपादक : सुरंजन, २००७) मगध प्रकाशन से। (3.) आग यह बदलाव की (ग़ज़ल संग्रह, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से। (4.) मन में नाचे मोर है (जनक छंद, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से।

अनपढ़ सदा दुखी रहा, कहे कवि महावीर
पढा-लिखा इंसान ही, लिखता है तक़दीर
लिखता है तक़दीर, अलिफ, बे को पहचानो
क, ख, ग को रखो याद, विदेशी भाषा जानो
धरती से ब्रह्माण्ड, ज़मानां पहुंचा पढ़-पढ़
जागो बरखुरदार, रहो न आज से अनपढ़

(37.) उत्साहित हैं गोपियाँ
उत्साहित हैं गोपियाँ, नाचे मन में मोर
रूप-रंग श्रृंगार का, कौन सखी चितचोर
कौन सखी चितचोर, पूछ रही हैं गोपियाँ
करती है हुड़दंग, ग्वाल-बाल की टोलियाँ
महावीर कविराय, कृष्ण जहाँ समाहित हैं
देह अलौकिक गंध, सभी जन उत्साहित हैं

(38.) गोरी इतराकर कहे
गोरी इतराकर कहे, प्रीतम मेरा चाँद
अजर-अमर आभा रहे, कभी पड़े ना मांद
कभी पड़े ना मांद, नज़र न लगाओ कोई
प्रीतम है मासूम, करीब न आओ कोई
महावीर कविराय, न कोई कर ले चोरी
तुझे छिपा लूँ चाँद, कहे इतराकर गोरी

(39.) क्यों पगले डरता यहाँ
क्यों पगले डरता यहाँ, काल सभी को खाय
यह तो गीता सार है, जो आए सो जाय
जो आए सो जाय, बात है बिलकुल सच्ची
कहें सभी विद्वान, साँस की डोरी कच्ची
महावीर कविराय, समय से पहले मरता
मौत है कटू सत्य, बता क्यों पगले डरता

(40.) पंछी बेशक कैद है
पंछी बेशक कैद है, पाँव पड़ी ज़ंजीर
लेकिन मन को बांधकर, कब रखा महावीर
कब रखा महावीर, नाप लेता जग पल में
जब भी जिया उदास, घूमता बीते कल में
कहे कवि खरे बोल, ह्रदय करता है धक-धक
दिल तो है आज़ाद, कैद हो पंछी बेशक

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6 टिप्पणियां

  1. महावीर उत्तरांचली बधाई ! महावीर उत्तरांचली जी बहुत सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर है सभी प्रेरक रचनाएँ!
    हार्दिक बधाई!

    जवाब देंहटाएं
  3. रमेश कुमार7 अप्रैल 2016 को 10:14 am

    क्यों पगले डरता यहाँ, काल सभी को खाय
    यह तो गीता सार है, जो आए सो जाय ..

    सही बात है

    जवाब देंहटाएं
  4. शब्दाडम्बर से दूर आपकी कुण्डकियाँ सरसता लिये हुए हैं । हार्दिक बधाई !

    जवाब देंहटाएं

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