HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

जागो मेरे देश! [कविता] - पद्मा मिश्रा

IMAGE1

पद्मा मिश्रारचनाकार परिचय:-
पद्मा मिश्रा का०हि०वि०, वाराणसी में पात्रता प्राप्त व्याख्याता हैं। आप कई विधाओं में रचना करती हैं, यथा - कविता, कहानी, ललित निबन्ध, पुस्तक समीक्षा आदि। आपकी कई रचनाओं का प्रकाशन कादम्बिनी, परिकथा, वर्तमान साहित्य, स्वर मंजरी, मधुस्यंदी, पुष्पगंधा, हिंदी चेतना, सृजक, विश्वगाथा [नव्या] आदि पत्रिकाओं तथा हिंदुस्तान, दैनिक जागरण [कानपुर, जम्शेदपुर], प्रभात खबर, दैनिक भास्कर, न्यू इस्पात मेल आदि पत्रों में हुआ है। 
"साँझ का सूरज" [कहानी संग्रह] तथा ''सपनों के वातायन" [काव्य संग्रह] आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैं। काव्य संकलन "जो दिल में है" तथा कहानी संकलन "पठार की खुशबू" में भी आपकी रचनायें प्रकाशित हैं। बहुभाषीय साहित्यिक संस्था ''सहयोग'' तथा ''अक्षर-कुम्भ'' की आप सक्रिय सदस्य हैं।
आपको ''अक्षर कुम्भ अभिनन्दन सम्मान", "किशोरी देवी साहित्य सम्मान" तथा बाल साहित्य परिषद की ओर से "जय प्रकाश भारती सम्मान" से सम्मानित किया जा चुका है।
थम गया है,
वादों -नारों नगाड़ों का शोर ,
खामोश हो गई -
अघोषित महाभारत की दुनिया ,
अब टूट रही है खामोशियाँ -
अंतर्मन की -
खामोशियों को टूटना ही होगा,
सुनो -अंतरात्मा की आवाज सुनो ,
कभी तो जागे यह अंतश्चेतना !
नहीं चाहते क्या ?
इस जागरण को मुखर होने दो,
बदल जाने दो सारी तस्वीरें,
तभी बदलेगा -समूचा परिदृश्य ,
उन तस्वीरों के बदले रंग -
उनका मौन रेखाचित्र ,
एक नई इबारत लिखेगा -
संवेदना की लेखनी से ,
मानवता के नाम --
जागो मेरे देश!,,,,

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...