IMAGE1
सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त आदमी को देखकर भीड़ तरह-तरह की बातें बना रही थी ---


 महावीर उत्तरांचली रचनाकार परिचय:-



१. पूरा नाम : महावीर उत्तरांचली
२. उपनाम : "उत्तरांचली"
३. २४ जुलाई १९७१
४. जन्मस्थान : दिल्ली
५. (1.) आग का दरिया (ग़ज़ल संग्रह, २००९) अमृत प्रकाशन से। (2.) तीन पीढ़ियां : तीन कथाकार (कथा संग्रह में प्रेमचंद, मोहन राकेश और महावीर उत्तरांचली की ४ — ४ कहानियां; संपादक : सुरंजन, २००७) मगध प्रकाशन से। (3.) आग यह बदलाव की (ग़ज़ल संग्रह, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से। (4.) मन में नाचे मोर है (जनक छंद, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से।

"हाय राम! कितनी बेदर्दी से कुचल गया है ट्रक वाला इसे, शायद ही बचेगा।"

"आग लगा दो ट्रक वाले को… साले अन्धे होकर चलते हैं।"

"बहुत ख़ून बह गया है बेचारे का।"

"अरे कोई हास्पिटल ले चलो बेचारे को शायद बच जाये।"

"अरे भाईसाहब आप तो टैक्सी वाले हैं।"

"तो फिर ..."

"फिर क्या आप अपनी टैक्सी में बिठाकर ले चलिए उसे अस्पताल?"

"इसके ख़ून से जो सीटें खराब होंगी, उसकी धुलाई के पैसे क्या तेरा बाप देगा?"

"ओये भैन के ... तमीज़ से बोल वरना अभी मिनट में रामपुरी अन्दर कर दूंगा।"

"अरे भाईसाहब, आप लोग क्यों लड़ रहे हो? मैंने एम्बुलेंस और पुलिस वालों को फोन कर दिया है। बस थोड़ी देर में आ जायेंगे।"

"चलो-चलो, सब भीड़ मत लगाओ। ऐसे हादसे तो होते ही रहते हैं।"

इसी तरह भीड़ हटती और छंटती रही। सभी लोग दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति का तमाशा देखते रहे। किसी ने ये नहीं सोचा कि किसी रास्ते या मोड़ पर उनमे से किसी के साथ ऐसा ही कोई हादसा पेश आ सकता है और फिर वहां भी मौजूद होगी, ऐसी ही सोच! ऐसी ही न खत्म होने वाली बातें!

1 comments:

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Get widget